ग्वालियर प्रेस क्लब के प्रतिनिधि मंडल ने आज शनिवार को डॉ. मोहन यादव के नाम पत्रकारों की मांगो को लेकर ज्ञापन आशीष अग्रवाल को सौंपा
मध्यप्रदेश में पत्रकारिता जगत लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता आ रहा है। प्रदेश के पत्रकार विपरीत परिस्थितियों, आर्थिक चुनौतियों तथा विभिन्न जोखिमों के बीच जनहित के मुद्दों को शासन-प्रशासन एवं समाज के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाते हैं।
पत्रकारों के हित में शासन द्वारा समय-समय पर अनेक घोषणाएं एवं सुविधाएं प्रदान किए जाने की पहल की गई है। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अपेक्षित निर्णय एवं क्रियान्वयन अभी शेष है। अतः पत्रकार हित में निम्न मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक आदेश जारी किए जाने का आग्रह है—
पत्रकारों को रेलवे किराये में रियायत पुनः प्रारंभ की जाए
कोरोना महामारी के दौरान पत्रकारों को रेलवे यात्रा में प्रदान की जाने वाली किराये की रियायत स्थगित कर दी गई थी। महामारी की परिस्थितियां समाप्त हो जाने के बाद भी यह सुविधा पुनः प्रारंभ नहीं हुई है।
अतः पत्रकारों को पूर्व की भांति रेलवे किराये में प्रदान की जाने वाली रियायत पुनः प्रारंभ किए जाने हेतु केंद्र सरकार से आवश्यक पहल एवं आग्रह किया जाए।
पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा के स्थान पर आयुष्मान योजना का लाभ
पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत पत्रकारों को प्रतिवर्ष स्वास्थ्य बीमा के लिए राशि का भुगतान करना पड़ता है। पत्रकारों के हित में यह व्यवस्था समाप्त करते हुए पात्र पत्रकारों एवं उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान की जाए।
उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा पत्रकारों को लंबे समय से आयुष्मान योजना का लाभ प्रदान किए जाने की व्यवस्था का अध्ययन करते हुए मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार की सुविधा लागू की जाना पत्रकार हित में महत्वपूर्ण कदम होगा।
श्रद्धानिधि की राशि बढ़ाकर 40 हजार रुपये की जाए
मध्यप्रदेश शासन द्वारा पत्रकारों को प्रदान की जाने वाली श्रद्धानिधि की वर्तमान राशि 20 हजार रुपये प्रतिमाह है। वर्तमान महंगाई एवं जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए इसे बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना आवश्यक है।
साथ ही गंभीर एवं असाध्य बीमारियों से पीड़ित पत्रकारों के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए श्रद्धानिधि की निर्धारित आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान की जाए।
पत्रकारिता संस्थानों में पत्रकारों की सेवानिवृत्ति आयु सामान्यतः 58 वर्ष होने के दृष्टिगत शासन द्वारा श्रद्धानिधि प्राप्त करने की आयु सीमा को भी घटाकर 58 वर्ष किया जाना न्यायोचित एवं पत्रकार हित में होगा।
दिवंगत पत्रकारों के परिवार को 8 लाख रुपये की सहायता राशि
बीमारी, दुर्घटना अथवा अन्य कारणों से असामयिक मृत्यु का शिकार होने वाले पत्रकार के परिवार को शासन द्वारा पूर्व में घोषित प्रावधान के अनुसार 8 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की गई थी।
दुर्भाग्य से इस योजना का अपेक्षित रूप से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। अतः पूर्व में की गई घोषणा के अनुरूप दिवंगत पत्रकार के आश्रित परिवार को 8 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान किए जाने हेतु लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कराने तथा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
महोदय,उपरोक्त मांगें प्रदेश के पत्रकारों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई हैं। पत्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी शासन की योजनाओं, जनसमस्याओं एवं जनहित के विषयों को समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि उपरोक्त सभी विषयों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय लेकर पत्रकार हित में आदेश जारी करने की कृपा करें।
हमें पूर्ण विश्वास है कि आपकी सरकार पत्रकारों की समस्याओं एवं उनकी सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले। इस अवसर पर ग्वालियर प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश शर्मा सचिव सुरेश शर्मा,वरिष्ठ पत्रकार सुरेश दंडोतिया,विनय अग्रवाल,अजय मिश्रा, प्रवीण दुबे, सुरेंद्र माथुर,राजेंद्र तलेगावकर, जोगेन्द्र सेन हरीश चंद्रा, राजेश जायसवाल , रवि उपाध्याय , राकेश वर्मा, जयदीप सिकरवार,विक्रम प्रजापति, रघुवीर कुशवाह,सहित अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।