ऑस्टियोपोरोसिस जैसी खतरनाक बीमारी को समाज की जागरूकता से ही रोका जा सकता। अगर प्रारंभिक स्टेज में मरीज सिर्फ उचित खानपान और व्यायाम कर ले,तो फिर ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये बात जीआर मेडीकल कॉलेज के डीन डॉ आरकेएस धाकड़ ने सीएमई में कही। वे ग्वालियर आर्थोपेडिक सोसायटी द्वारा बोन एंड ज्वाइंट वीक के तहत आयोजित सीएमई में चीफ स्पीकर के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यशला का आयोजन एक निजी होटल में किया गया।
उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस का मरीज डॉक्टर के पास तीसरी या चौथी स्टेज में आता है। तो डॉक्टर को फिर मजबूरन ऑपरेशन की सलाह देना पड़ती है। ग्वालियर आर्थोपेडिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉ आर एस बाजोरिया ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस के प्रारंभिक लक्षणों में कुछ दूर चलने से ही दर्द होना, काम करने में थकान होना, हड्डियों या जोड़ में दर्द रहना आदि हैं। इन लक्षणों के आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। तो आपकी बीमारी सिर्फ उचित खानपान और लाइफ स्टाइल बदलने से ही ठीक हो जाएगी। सीएमई का संचालन ग्वालियर आर्थोपेडिक सोसायटी के सचिव डॉ आशीष दुबे ने किया। आभार ग्वालियर आर्थोपेडिक सोसायटी के उपाध्यक्ष प्रोफ़ेसर डॉ सुरेंद्र सिंह यादव ने किया। सीएमई में पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ प्रशांत लहरिया, डॉ अनुपम गुप्ता, डॉ देवेश बांदिल,डॉ मनीष बैरागी, डॉ राजकुमार गर्ग आदि उपस्थित रहे।