मित्रता हो श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी हो: शास्त्री
कोयला वाले हनुमान मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम
ग्वालियर। श्रीकृष्ण के द्वारिकाधीश होने के बावजूद सुदामा ने उनसे कभी कुछ नहीं मांगा। अपनी पत्नी सुशीला के कहने पर जब वे द्वारिकापुरी गए, तो श्रीकृष्ण ने बिना कहे ही उनकी स्थिति जान ली और उनकी दरिद्रता दूर कर दी। यह विचार पं शरद कुमार शास्त्री ने मोतीझील कोयला वाले हनुमान पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस मंगलवार को व्यक्त किए। अंत में ब्रज की होली का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों के साथ श्रद्धालुओं ने भी खूब नृत्य किया।
उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र अपने मित्र से स्वार्थ नहीं रखता है,लेकिन जरूरत होने पर अपने मित्र की मदद जरूर करता है। श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता हमें यही सीख देती है। सुदामा की पत्नी सुशीला अपने घर के आर्थिक हालातों को समझती है और अपने पति से कभी कोई डिमांड नहीं करती। आजकल की माता बहनों को भी अपनी परिस्थिति को भलीभांति समझते हुए अपने पति से डिमांड करनी चाहिए। सुशीला जैसी पत्नी मिल जाए तो वह पति को निर्लोभी बना देती है। सुदामा विद्यालय चलाते थे,लेकिन दरिद्र होते हुए भी बच्चों से कोई शुल्क नहीं लेते थे,लेकिन आज शिक्षा व्यवसाय हो गई है। सामान्य घर के बच्चों के लिए पढ़ाई कठिन होती जा रही है। सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुश के आसन पर बैठकर पूजा पाठ करने से सकारात्मक उर्जा उत्पन्न होती है। घर में भी रोज हवन पूजन कर शुद्धि करना चाहिए। मन, बुद्धि की शुद्धि के लिए भजन और प्रकृति की शुद्धि के लिए पौधों का रोपण एवं यज्ञ जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य का शत्रु है इससे दूर रहने के लिए हमें सदा भगवान का यह सोचते हुए स्मरण करना चाहिए कि मुझ में जो भी सामार्थ्य है, ये प्रभु का दिया हुआ है, तो मन में अंहकार नहीं आएगा। इस मौके पर कथा आयोजक एवं मंदिर के पुजारी संतोष भैया, कथा संयोजक प्रेम बरौनिया, यजमान निर्मला मेघसिंह राजावात, शत्रुघन सिंह, लालूसिंह, राजाबेटी, टीकाराम सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भागवत महापुरुाण की आरती की।