(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर। खेत की मिट्टी से जुड़ाव, हौसलों में नई सोच व मेहनत का जज्बा हो और सरकार की योजना का सहारा मिल जाए तो साधारण किसान भी अपनी और अपने गांव की तस्वीर बदल सकता है। ग्वालियर जिले के विकासखण्ड भितरवार के ग्राम चीनौर, निवासी युवा कृषक अमन गौर पुत्र बीरबल सिंह ने यह कर दिखाया है। उन्होंने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की योजना की मदद से कस्टम हायर केन्द्र खोलकर बड़ा मुनाफा कमाया है। साथ ही उनसे प्रेरणा लेकर अन्य ग्रामवासी आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर उन्नत खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
अमन गौर के कस्टम हायर सेंटर से रिवर्सिबल प्लाऊ, रोटावेटर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल और स्ट्रॉ रीपर जैसे आधुनिक यंत्र किराये पर मिलते हैं, जिनका उपयोग करके गांव के दर्जनों किसान समय पर बुआई और कटाई कर पा रहे हैं। वर्ष भर में इन यंत्रों ने करीब 960 घंटे खेतों में सेवाएं दीं और इसका सीधा लाभ 215 किसान परिवारों तक पहुंचा। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिस नरवाई को जलाकर पहले धुआं और प्रदूषण फैलता था, अब उसी नरवाई का यंत्रों की मदद से प्रबंधन होने लगा है । यानी मिट्टी की सेहत भी बची और हवा भी साफ रही। आर्थिक रूप से भी अमन का कस्टम हायर केन्द्र मिसाल बन गया है। वर्ष 2025-26 में केन्द्र ने कुल 11 लाख 54 हजार रुपये की आय अर्जित की, जबकि इसके संचालन पर 6 लाख 60 हजार रुपये खर्च हुए। इस तरह श्री अमन गौर को इस साल करीब 4 लाख 94 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
गांव में जब आधुनिक यंत्रों का अभाव था, तब किसान मजबूरी में या तो परंपरागत तरीकों पर निर्भर रहते थे। फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जला देते थे। सामान्य आर्थिक स्थिति के चलते महंगे कृषि यंत्र खरीदना अधिकांश किसानों के बूते के बाहर था। अमन गौर कहते है कि मुझे कृषि अभियांत्रिकी विभाग की कस्टम हायरिंग केन्द्र योजना की जानकारी मिली और उन्होंने इसे अपने गांव की तस्वीर बदलने का सुनहरा अवसर मानते हुए तुरंत आगे कदम बढ़ाया। वर्ष 2022-23 में उन्होंने लगभग 25 लाख रुपये लागत के उन्नत कृषि यंत्र खरीदे, जिस पर विभाग से उन्हें 9 लाख 37 हजार 800 रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसी सहायता से उनके गांव में एक ऐसा कस्टम हायरिंग केन्द्र खड़ा हुआ, जो आज पूरे क्षेत्र के किसानों की उम्मीद बन चुका है।
अमन गौर की सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बदलाव की एक जीती-जागती मिसाल है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य युवा भी कृषि को आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने की सोच रहे हैं। इच्छुक कृषक "जे-फार्म" ऐप पर पंजीकरण कराकर इस केन्द्र की सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और अपने खेत की तस्वीर भी बदल सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं सरकार के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहते हैं कि इस सरकार ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की कस्टम हायर योजना के माध्यम से किसानों को खुशहाली की राह दिखाई है।