ग्वालियर। उद्धव भगवान कृष्ण की भांति ही सुंदर दिखते थे। उन्हें अपने ज्ञान का अभिमान था, जिसे तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने उन्हें गोपियों के बीच भेजा, जहां गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निस्वार्थ प्रेम ने उनका ज्ञान का अभिमान तोड़ दिया। यह विचार पं शरद कुमार शास्त्री ने सोमवार को मोतीझील स्थित कोयला वाले हनुमान मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छंठवे दिन सोमवार को व्यक्त किए। इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणि के विवाह का सुंंदर चित्रण किया गया।
शास्त्री ने कहा कि वैरागी बनकर भी भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, वहीं भक्ति के माध्यम से भी प्रभु को प्राप्त कर सकते हैं। मनुष्य का मन संसार में लगा रहता है, इसलिए उसे आसन, बासन( बर्तन) और राशन याद आता है और वह भगवान को भूल जाता है, लेकिन जिसके मन में भगवान बसते हैं, उसे संसारी वस्तुएं याद नहीं आती हैं। उन्होंने कहा कि सौंदर्य वह है जो कामना उत्पन्न न करे बल्कि कामना को खत्म कर दे। प्रेम करने वाले से प्रेम करते हैं तो कामना और भगवान के प्रेम करते हैं तो उपासना जाग्रत होती है। उन्होंने बताया कि रास से भगवान श्रीकृष्ण ने काम को जीत लिया।
उन्होंने बताया कि एक हाथ से पैर नहीं छूना चाहिए, बल्कि साष्टांग प्रणाम करना चाहिए। इससे सामने वाले के दिव्य गुण भी आप में समाहित हो जाते हैं। सासुमां के पैर नित्य प्रति न सिर्फ छूना चाहिए बल्कि दबा दबा कर उन्हें आराम देना चाहिए। इससे सास का प्रेम आपको मिलेगा और प्रेेम के प्रताप से आपका चेहरा भी दमकने लगेगा। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और यदि कुंडली में पितृदोष है तो वो भी मिट जाता है। इस मौके पर कथा आयोजक एवं मंदिर के पुजारी संतोष भैया, कथा संयोजक प्रेम बरौनिया, यजमान निर्मला मेघसिंह राजावात, शत्रुघन सिंह, लालूसिंह, राजाबेटी, टीकाराम सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भागवत महापुरुाण की आरती की।