ग्वालियर। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर अदम्य साहस का परचम लहराने वाले वीर शहीदों के बलिदान को याद करते हुए जीवाजी विश्वविद्यालय में रविवार को कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और देशभक्ति के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय परिवार ने दो मिनट का मौन रखकर अमर जवानों को श्रद्धांजलि दी और उनके शौर्य, त्याग एवं राष्ट्रसेवा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी कुलगुरु प्रो.डी.एन. गोस्वामी,प्रोक्टर प्रो. एस.के.सिंह, प्रो.एस.एन.महापात्रा,प्रो.एस के श्रीवास्तव एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.जे.एन.गौतम द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
प्रभारी कुलगुरु प्रो. डी.एन. गोस्वामी ने कहा कि भारतीय सेना के वीर जवानों के अद्वितीय साहस और बलिदान के कारण ही देशवासी सुरक्षित एवं स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हमेशा अपने सैनिकों का ऋणी रहेगा और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। प्रोक्टर प्रो. एस.के. सिंह ने कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों और कड़ाके की ठंड के बीच अदम्य पराक्रम का परिचय देते हुए कारगिल की चोटियों पर तिरंगा फहराकर विजय प्राप्त की थी। वहीं प्रो. एस.एन. महापात्रा ने कहा कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान की भावना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। कार्यक्रम में प्रो. एस.के. श्रीवास्तव ने भी शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि कारगिल के वीर सपूतों का त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। समापन अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. जे.एन. गौतम ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, शौर्य और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं में कारगिल विजय दिवस पर निबंध लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 15 अगस्त को कुलगुरु द्वारा सम्मानित किया जाएगा।