"शिक्षा ही सबसे बड़ा उपहार" : फूटी कॉलोनी में बच्चों को स्टेशनरी एवं वस्त्र वितरित, बाबा साहेब के शिक्षा संदेश को किया आत्मसात
ग्वालियर, मुरार। गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS) द्वारा मुरार की फूटी कॉलोनी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में सामाजिक उत्तरदायित्व एवं शिक्षा प्रोत्साहन के उद्देश्य से एक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी सामग्री, टी-शर्ट, ट्राउजर तथा अन्य उपयोगी सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गौतम बुद्ध एवं भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर भंते जी, श्रीप्रकाश सिंह निमराजे (अध्यक्ष, गोपाल किरन समाजसेवी संस्था), श्री कुलदीप सिंह तथा अन्य अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर सभी ने सामाजिक समरसता, शिक्षा और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
अपने उद्बोधन में श्री कुलदीप सिंह ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का "शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो" का संदेश आज भी समाज के लिए उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाती है। प्रत्येक परिवार का प्रथम दायित्व है कि वह अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि "यदि हमें स्वयं कठिनाइयों का सामना करना पड़े तो भी चलेगा, लेकिन हमारे बच्चों की शिक्षा कभी नहीं रुकनी चाहिए। शिक्षा ही सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे कोई छीन नहीं सकता।" उन्होंने कहा कि एक शिक्षित बच्चा केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य बदल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक समानता, शिक्षा, लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और मानव गरिमा की स्थापना के लिए समर्पित किया। उन्होंने वंचित, श्रमिक, महिला एवं शोषित वर्गों को शिक्षा, समान अवसर, मौलिक अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। भारतीय संविधान के माध्यम से उन्होंने समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी। इसलिए बाबासाहेब केवल किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के प्रेरणास्रोत और आधुनिक भारत के महान शिल्पकार हैं।
इस अवसर पर बच्चों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, स्वच्छता, नैतिक मूल्यों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया गया। अभिभावकों से भी आग्रह किया गया कि वे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा उन्हें विद्यालय से निरंतर जोड़कर रखें।
कार्यक्रम के अंत में जरूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी सामग्री, टी-शर्ट, ट्राउजर एवं अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बनता था। उपस्थित महिलाओं एवं अभिभावकों ने गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया।
कार्यक्रम के समापन पर संस्था ने संकल्प व्यक्त किया कि वह भविष्य में भी शिक्षा, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर संचालित करती रहेगी, ताकि समाज का प्रत्येक बच्चा शिक्षा, सम्मान और अवसरों से जुड़कर एक सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके।