ग्वालियर। दीक्षारंभ केवल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि आपके सपनों, संकल्पों और जिम्मेदारियों की नई यात्रा का प्रथम कदम है। विश्वविद्यालय आपको केवल डिग्री नहीं, बल्कि ऐसा ज्ञान, संस्कार और दृष्टिकोण प्रदान करता है जो आपको एक सफल पेशेवर के साथ-साथ संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक भी बनाता है।अपने माता-पिता व विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें। यह नया बैच अपनी उपलब्धियों से नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह बात मंगलवार को कुलगुरू डॉ.राजकुमार आचार्य ने जेयू के विधि विभाग में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में कही।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें विधि शिक्षा के उद्देश्य, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका से अवगत कराया गया।विभागाध्यक्ष डॉ. जी.के. शर्मा ने स्वागत भाषण में कहा कि विधि का अध्ययन केवल कानून की धाराएं याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय स्थापित करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ चरित्र और संवेदनशीलता भी आवश्यक है।अपने ज्ञान का उपयोग न्याय और मानवता की सेवा के लिए करना चाहिए। जिला न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र सिंह कुशवाह ने विद्यार्थियों से लगन, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण के साथ अध्ययन करने का आग्रह किया।वहीं डीएसपी कृष्णपाल सिंह ने आत्मचिंतन और ज्ञानार्जन को जीवन की सफलता का आधार बताते हुए विद्यार्थियों को संस्थान से अधिकतम सीख लेकर जाने की प्रेरणा दी।प्रो. एस.के. सिंह ने विश्वविद्यालय को रैगिंग मुक्त परिसर बताते हुए विद्यार्थियों से रैगिंग का विरोध करने, समय का सदुपयोग करने और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने की सलाह दी।प्रो. जे.एन. गौतम ने कहा कि व्यक्ति को पहले स्वयं का निर्माण करना चाहिए, तभी परिवार और राष्ट्र का सशक्त निर्माण संभव है।कार्यक्रम का संचालन डॉ. गुंजन सिंघल ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रो. संजय कुलश्रेष्ठ ने व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. जे.एन. गौतम, प्रो. संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. जी.के. शर्मा, डॉ. रामशंकर सिंह सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।