व्हाईट हाउस ने क्या प्रवीण के खिलाफ 2025 में ही साजिश रच दी थी?


ग्वालियर। मध्यप्रदेश चेंबर आफ कामर्स एंड इण्डस्ट्रीज के चुनावों में व्हाईट हाउस को छोड़कर आम व्यापारी के हितों की लड़ाई लड़ रहे अध्यक्ष पद के स्वतंत्र प्रत्याशी डा. प्रवीण अग्रवाल के खिलाफ व्हाईट हाउस ने क्या साजिश रची थी, जबकि वह एक अंतिम चुनाव और व्यापारी हित की लड़ाई के लिये लड़ना चाहते थे। यह बात स्पष्ट हो गई है कि पारस जैन को व्हाईट हाउस से लड़ाने की योजना अगस्त 2025 में ही लिख गई थी, जब पारस जैन के दिये एक नगर भोज में जीएल भोजवानी ने अरविंद अग्रवाल की उपस्थिति में ऐलान कर दिया था कि पारस जैन व्हाईट और क्रियेटिव दोनों हाउसों के ही प्रत्याशी होंगे। इस भोज की सभा में पारस जैन का महिमा मंडन किया गया था और इसमे क्रियेटिव हाउस का दंभ भरने वाले विजय गोयल व हेमंत गुप्ता भी मौजूद थे, जो पारस जैन के यहां पूरी तरह सरेंडर थे। 
बताया जाता है कि व्हाईट हाउस अध्यक्ष प्रत्याशी पारस जैन की उम्मीदवारी को लेकर काफी बाबेला मचा था, लेकिन अब सर्राफ से अरविंद अग्रवाल के हम पेशा हो गये पारस जैन उनके खास है। इसी कारण अब वर्तमान लोकप्रिय अध्यक्ष रहे डा. प्रवीण अग्रवाल को निपटाने के लिये सारा खेल रचा गया था। 
बलि का बकरा बनाये गये प्रवीण, प्रशांत और भूपेन्द्र
पारस जैन को व्हाईट हाउस का अध्यक्ष प्रत्याशी बनाने के लिये प्रशांत गंगवाल से लेकर डा. प्रवीण अग्रवाल, भूपेन्द्र जैन के नाम को बलि का बकरा बनाया गया। जबकि डा. प्रवीण अग्रवाल ने अध्यक्ष पद के लिये एक अंतिम मौका मांगा था। भूपेन्द्र जैन काफी समय से अध्यक्ष पद के लिये वेटिंग में थे और उन्होंने व्यापारी समाज में काफी काम भी किये थे। बाद में इसी गुटबाजी के कारण भूपेन्द्र जैन ने अपनी उम्मीदवारी त्याग दी थी, यहीं स्थिति प्रशांत गंगवाल के समक्ष भी बनी। यदि प्रशांत गंगवाल संयुक्त अध्यक्ष पर लड़ते तो आज सुरेश बंसल भी चुनाव में फंसे होते, अब उनकी सीट सबसे आसान हो गई हैं।
पारस व हेमंत का एक दूसरे पर उपकार
व्हाईट हाउस व क्रियेटिव हाउस के लोग कुछ भी कहें। अब यह सत्य किस्सा भी पढ़ ले। पिछले चुनाव में पारस जैन व्हाईट से और हेमंत गुप्ता क्रियेटिव से संयुक्त अध्यक्ष पद की दावेदारी में आमने सामने आने ही वाले थे कि दोनों के समान मित्रों ने पर्ची का फार्मूला दिया कि जिसकी पर्ची निकले वहीं चुनाव लड़े। पर्ची हेमंत गुप्ता की निकली तो पारस जैन व्हाईट हाउस से हेमंत गुप्ता के खिलाफ नहीं लड़े। हेमंत गुप्ता क्रियेटिव से लड़े तो व्हाईट हाउस ने संयुक्त अध्यक्ष पर डा. प्रकाश अग्रवाल को उतार दिया और व्हाईट के लोगों ने ही मिलकर डा. प्रकाश अग्रवाल को 791 वोटों से जान बूझकर हरवा दिया, ताकि हेमंत गुप्ता जीते और अगले चुनाव में पारस जैन के लिये सपोर्ट करें।
अब यहीं उपकार उतारा
व्हाईट हाउस के पारस जैन का यहीं उपकार अब क्रियेटिव के हेमंत गुप्ता ने उतारा है। वैसे क्रियेटिव हाउस हेमंत गुप्ता को अध्यक्ष पद पर लड़ाना चाहता था, लेकिन हेमंत गुप्ता ने पारस जैन के अहसान के बदले चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया। इसमे विजय गोयल भी पारस जैन से मित्रता के चलते दमदारी से प्रत्याशी उतारने का फैसला ले ही नहीं सकें। 
80-85 लोगों की बैठक में केवल अरविंद ही पारस के पक्ष में थे
व्हाईट हाउस के कोर ग्रुप की बैठक में अध्यक्ष प्रत्याशी तय करने की बात का दावा सर्वसम्मति से जो अरविंद अग्रवाल ने किया। उसका मूल सत्य यह है कि कोर ग्रुप में जीएल भोजवानी व पीताम्बर लोकवानी, अरविंद अग्रवाल की  वजह से कुछ बोल ही नहीं पाये। राजकुमार गर्ग ने इसका विरोध भी किया कि स्वच्छ छवि वाले किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाओ, उनकी भी बात अनसुनी की गई और अरविंद अग्रवाल का निर्णय हाउस पर थोप दिया गया।
मार्मिक अपील को भी इग्नोर किया
व्हाईट हाउस की इस बैठक में वर्तमान अध्यक्ष डा. प्रवीण अग्रवाल ने अपने खिलाफ इस साजिश को देखकर मार्मिक अपील भी की कि मेरा यह आखिरी चुनाव है, मैंने चेंबर और व्यापारी हित में जो काम किये हैं उनको पूरा करने और बढ़ाने का समय हैं। मुझे एक मौका और दों। लेकिन व्हाईट हाउस के तानाशाहों ने उनके आंसुओं का भी मजाक उड़ाया। यहीं कारण था कि डा. प्रवीण अग्रवाल का व्हाईट हाउस से मोहभंग हो गया और डा. प्रवीण अग्रवाल स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष पद पर चुनावी मैदान में आ डटे हैं। उनकी लोकप्रियता के चलते अब व्हाईट और क्रियेटिव हाउस से उपर उठकर व्यापारी समाज अंतरात्मा की आवाज पर उनके हक में खड़ा हैं।  
 

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