व्हाईट हाउस ने विपुल गुप्ता को ऐनवक्त पर धोखा दिया

- दीपक पमनानी को दबाब में बनाया उम्मीदवार
ग्वालियर। व्हाईट हाउस के लोगों को कम ही पता होगा कि पहले व्हाईट संयुक्त सचिव के पद के लिये विपुल गुप्ता का नाम तय था और दो तीन माह से व्हाईट हाउस के कोर ग्रुप प्रमुख अरविंद अग्रवाल को भी पता था, लेकिन ऐनवक्त पर विपुल गुप्ता का नाम काटकर दीपक पमनानी को दबाब में उम्मीदवार बनाया गया।
जानकारी के मुताबिक कैट के प्रमुख पदाधिकारी रवि गुप्ता ग्वालियर में व्यापार समाज में काफी एक्टिव है, वह इस बार चेंबर की राजनीति में अपने पुत्र विपुल गुप्ता को उतारना चाहते थे। इसके लिये वह पिछले छह माह से तैयारी भी कर रहे थे। बताया जाता है कि कैट के पदाधिकारी रवि गुप्ता ने इसकी जानकारी व्हाईट हाउस के कोर ग्रुप प्रमुख अरविंद अग्रवाल से लेकर डा. वीरेन्द्र गंगवाल, जीएल भोजवानी आदि सभी को दे भी दी थी। इसकी जानकारी कैट के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र जैन को भी थी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कैट को स्थापति करने में रवि गुप्ता ने काफी महत्वपूर्ण योगदान भी दिया है इसीलिये रवि गुप्ता का मानना था कि उनके बेटे विपुल गुप्ता को टिकट हो जायेगा तो पूरी कैट टीम व्हाईट हाउस के लिये लगा देंगे। लेकिन जब टिकट फाइनल हुआ तो कैट के एक पदाधिकारी विपुल गुप्ता को छोड़कर दीपक पमनानी के लिये अड़ गये। 
वहीं अरविंद अग्रवाल किसी भी कीमत पर व्हाईट हाउस के ज्यादा प्रत्याशियों को जिताने की आशा में कैट से ही आये दीपक पमनानी के लिये अड़े कैट के पदाधिकारी के फेर में आ गये। बताया जाता है कि विवाद बढ़ता देख डा. वीरेन्द्र गंगवाल ने विपुल गुप्ता व दीपक पमनानी की गोटी डालने की बात भी कहीं। लेकिन इन लोगों के अड़ने के कारण दीपक पमनानी को संयुक्त सचिव का उम्मीदवार बना दिया गया। सूत्र बताते है कि इस घटना के बाद रवि गुप्ता से लेकर उनके पुत्र विपुल गुप्ता व कैट की टीम व्हाईट हाउस से अपने आपको ठगा महसूस कर रही हैं। 
एक्टिव नहीं हो रहे विजय गोयल
इधर क्रियेटिव हाउस के लोग अपने कोर ग्रुप के प्रमुख विजय गोयल के घर बैठने से बेहद परेशान है। जिस कारण अब कुछ प्रत्याशियों की नैय्या पार लगाने की जिम्मेदारी संयुक्त अध्यक्ष पद प्रत्याशी सुरेश बंसल के कंधों पर आ पड़ी हैं। वहीं सचिव पद के प्रत्याशी राकेश अग्रवाल ने भी अपने प्रतिद्वंदी व्हाईट हाउस के प्रत्याशी दीपक अग्रवाल की घेराबंदी शुरू कर दी है। 

अगले अंक में पढ़िये 
पारस जैन की उम्मीदवारी का सच


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