आरजेआईटी में मुनिश्री 108 समत्व सागर जी महाराज का प्रेरक उद्बोधन, विद्यार्थियों को दिए जीवन प्रबंधन के सूत्र



ग्वालियर। रुस्तमजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आरजेआईटी), बीएसएफ अकादमी ग्वालियर में "संत सानिध्य में विद्यार्थी जीवन" विषय पर प्रेरक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रख्यात जैन संत मुनिश्री 108 समत्व सागर जी महाराज (गूगल बाबा) ने विद्यार्थियों को आत्मानुशासन, सकारात्मक सोच, चरित्र निर्माण एवं जीवन प्रबंधन के महत्वपूर्ण सूत्र बताए।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत समारोह से हुआ। स्टूडेंट काउंसिल के संयोजक निखिल बी. ने नारियल भेंट कर मुनिश्री का अभिनंदन किया। अपने उद्बोधन में मुनिश्री ने कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के भविष्य की आधारशिला है। इस दौरान अर्जित ज्ञान, संस्कार और आदतें ही जीवन की दिशा तय करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।

मुनिश्री ने विद्यार्थियों को बुराइयों, अहंकार और गलत संगति से दूर रहने का संदेश देते हुए रावण और भगवान राम का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि रावण अत्यंत विद्वान, ज्ञानी और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार एवं अवगुणों के कारण पतन का शिकार हुआ, जबकि भगवान राम ने मर्यादा, विनम्रता और सदाचार के मार्ग पर चलकर आदर्श पुरुषोत्तम का स्थान प्राप्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित न रहें, बल्कि अच्छे संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी अपने जीवन का आधार बनाएं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री और बड़ा पैकेज ही सफलता का मानदंड नहीं है, बल्कि आत्मिक शांति, नैतिकता और आत्मविश्वास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन, आत्मचिंतन और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुनिश्री ने सरल एवं प्रेरणादायक उत्तर दिया। कार्यशाला में ध्यान एवं आत्मविकास से संबंधित गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के अंत में ओएसडी-आरजेआईटी एवं कमांडेंट सीएसएमटी  मनीष चंद्रा तथा प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार जैन ने मुनिश्री 108 समत्व सागर जी महाराज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नैतिक उत्थान एवं जीवन मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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