पार्थिव पूजन सरल,सुलभ, एवं अत्यंत फलदाई है अविरल कृष्ण
ग्वालियर श्री हनुमंत मण्डल सेवा समिति द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा का तृतीय दिवस सम्पन्न
ग्वालियर स्थित श्रीराम जानकी संकटमोचन हनुमान मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा व्यास भागवत रत्न से विभूषित पूज्य अविरल कृष्ण जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक वर्णन करते हुए रुद्राक्ष एवं पार्थिव शिवलिंग पूजन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
महाराज श्री ने बताया कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के करुणा भरे अश्रुओं से हुई है। जब भगवान शंकर ने समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु तप किया और अपने नेत्र खोले, तब उनके नेत्रों से गिरे अश्रु-बिंदुओं से रुद्राक्ष वृक्षों की उत्पत्ति हुई। इसलिए रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना गया है।
उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष धारण करने से मन में शांति, आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। रुद्राक्ष व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाता है तथा मानसिक तनाव, भय और अशांति को दूर करने में सहायक माना गया है। शास्त्रों में रुद्राक्ष धारण करने वाले भक्त पर भगवान शिव की विशेष कृपा बताई गई है। महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को विधि-विधानपूर्वक रुद्राक्ष धारण करने की प्रेरणा दी।
कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री ने पार्थिव शिवलिंग पूजन का महत्व बताते हुए कहा कि मिट्टी से निर्मित शिवलिंग का पूजन अत्यंत पुण्यदायी एवं कल्याणकारी माना गया है। शिव पुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का श्रद्धापूर्वक पूजन करने से भक्त के पापों का क्षय होता है, मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में भी पार्थिव पूजन सरल, सुलभ एवं अत्यंत फलदायी साधना है।
महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की भक्ति, सेवा, सदाचार एवं धर्ममय जीवन अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि शिव कृपा से ही जीवन में सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के दौरान श्रद्धालु शिवभक्ति के रस में सराबोर होकर हर-हर महादेव के जयघोष करते रहे।
कथा के उपरांत महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से आगामी दिवसों की कथा में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह
महाराज जी का माल्यार्पण स्वागत प्रदीप मितल, सुनील गर्ग, राम बाबू अग्रवाल, धर्म दास गुप्ता आदि ने किया