आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘टीबी की प्रारंभिक पहचान एवं रोकथाम‘ विषय पर कार्यशाला आयोजित

- संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता के माध्यम से टीबी की रोकथाम संभव हैः डाॅ. आशुतोष शर्मा

- नियमित स्वास्थ्य जांच और सही उपचार के माध्यम से इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता हैः प्रोफेसर डाॅ. मिनी अनिल

- कार्यशाला के दौरान हैंड्स-आन प्रशिक्षण सत्र का भी हुआ आयोजन

ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में स्कूल आफ नर्सिंग साइंस के वेलनेस हेल्थ क्लब द्वार ‘टीबी की प्रारंभिक पहचान एवं रोकथाम‘ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ. आशुतोष शर्मा (नोडल अधिकारी, एनआरसी ग्वालियर) शामिल हुए। इस अवसर पर स्कूल आफ नर्सिंग साइंस की डीन प्रोफेसर डाॅ. मिनी अनिल, एचओडी डाॅ. राकेश कुमार ढाका सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और बड़ी संख्या में नर्सिंग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। वहीं कार्यक्रम का संचालन डाॅ. पल्लवी सिन्हा द्वारा किया गया। 
संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता के माध्यम से टीबी की रोकथाम संभव हैः डाॅ. आशुतोष शर्मा
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘टीबी (टयूबरकुलोसिस) की प्रारंभिक पहचान एवं रोकथाम‘ विषय पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता डाॅ. आशुतोष शर्मा (नोडल अधिकारी, एनआरसी ग्वालियर) ने टीबी जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि समय रहते टीबी की पहचान और उचित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। अपने व्याख्यान में उन्होंने टीबी के शुरुआती लक्षणों जैसे लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार, रात में पसीना आना तथा कमजोरी आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि यदि किसी व्यक्ति में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहती है तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है। डॉ. शर्मा ने टीबी की जांच प्रक्रिया, आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों तथा सरकार द्वारा संचालित निःशुल्क उपचार योजनाओं की भी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता के माध्यम से टीबी की रोकथाम संभव है।
नियमित स्वास्थ्य जांच और सही उपचार के माध्यम से इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता हैः प्रोफेसर डाॅ. मिनी अनिल
कार्यशाला में डीन प्रोफेसर डाॅ. मिनी अनिल ने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी की समय रहते पहचान और उसके प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, नियमित स्वास्थ्य जांच और सही उपचार के माध्यम से इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा समाज में टीबी संबंधी भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र-छात्राओं को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक बनाना भी उतना ही आवश्यक है।
वहीं इससे पहले स्कूल आफ नर्सिंग साइंस के एचओडी डाॅ. राकेश कुमार ढाका द्वारा मुख्यवक्ता डाॅ. आशुतोष शर्मा को सैंपलिंग भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य टीबी प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाना रहा।

कार्यशाला के दौरान हैंड्स-आन प्रशिक्षण सत्र का भी हुआ आयोजन
कार्यशाला के दौरान हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन डॉ. पल्लवी सिन्हा द्वारा किया गया। इस सत्र में उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से टीबी प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने टीबी की जांच प्रक्रिया, रोगी देखभाल, संक्रमण से बचाव के उपाय तथा उपचार प्रबंधन से संबंधित तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं को सरल तरीके से समझाया। प्रशिक्षण सत्र के माध्यम से छात्र-छात्राओं और प्रतिभागियों को स्वास्थ्य सेवाओं में टीबी नियंत्रण की प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अवसर प्राप्त हुआ। आयोजन के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई। 
 
 
   

posted by Admin
10

Advertisement

sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
Get In Touch

Padav, Dafrin Sarai, Gwalior (M.P.)

98930-23728

sandhyadesh@gmail.com

Follow Us

© Sandhyadesh. All Rights Reserved. Developed by Anuj Mathur

<1-------Google-aNALY-------->