आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ का पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ समापन
- ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिवक्ताओं का होना बेहद आवश्यक हैः न्यायमूर्ति आशीष श्रोती
- जमीनी स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया को समझना एक अच्छे अधिवक्ता बनने के लिए बहुत जरूरी हैः न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव
- अधिवक्ता बनने के लिए नियमित अध्ययन, कई घंटों की मेहनत और निरंतर अभ्यास जरूरी हैः वरिष्ठ अधिवक्ता जयप्रकश मिश्रा
- सामाजिक सरोकारों, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी के साथ युवा अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ेंः प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान
- मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और पेशेवर क्षमताओं को विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय
- बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की टीम ने जीता खिताब
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ का समापन पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। संस्थान के सिथौली परिसर में आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोती, उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सेनीपत हरियाणा के कुलपति प्रोफेसर देवेंद्र सिंह, मध्यप्रदेश के वरिष्ठ अधिवक्ता जयप्रकाश मिश्रा, आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ लॉ की डीन प्रोफेसर डॉ. शोभा भारद्वाज सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और बड़ी संख्या में लॉ के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस प्रतियोगिता में देशभर से 32 टीमों ने सहभागिता की और अपने विधिक कौशल, तर्कशक्ति और प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और पेशेवर क्षमताओं को विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय
स्कूल ऑफ लॉ द्वारा ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के समापन समारोह की शुरूआत आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय ने स्वागत भाषण के साथ की। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से आए अतिथियों, प्रतिभागियों और स्कूल ऑफ लॉ के सभी फैकल्टी सदस्यों का स्वागत करते हुए आयोजन की सफलता के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा में तर्क, विश्लेषण और अपनी बात को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की विशेष भूमिका होती है। मूट कोर्ट प्रतियोगिता में एक छात्रा द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रभावशाली तर्कों का उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे एक विशेष प्रकार का ‘क्राफ्ट’ बताया। उन्होंने कहा कि कानून के क्षेत्र में प्रयुक्त मेथडोलॉजी, तर्क-वितर्क और इंक्वायरी की प्रक्रिया केवल विधि के छात्र-छात्राओं के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य शैक्षणिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में भी उपयोगी है। मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और पेशेवर क्षमताओं को विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं।
आम नागरिक का न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए अच्छे, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिवक्ताओं का होना बेहद आवश्यक हैः न्यायमूर्ति आशीष श्रोती
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के समापन समारोह के अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका और उनके सामाजिक दायित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आम नागरिक का न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए अच्छे, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिवक्ताओं का होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने फिल्म का उदाहरण देते हुए समझाया कि तमाम परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद आम व्यक्ति की अंतिम उम्मीद न्यायालय से ही जुड़ी होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 का उल्लेख करते हुए उन्होंने छात्र-छात्राओं को संवैधानिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में मुकदमों की कमी नहीं है, लेकिन सभी अधिवक्ताओं को समान रूप से काम नहीं मिलता। इसके पीछे मेहनत, पेशे के प्रति ईमानदारी और जिम्मेदारियों के निर्वहन में समर्पण जैसे महत्वपूर्ण कारक हैं। एक अधिवक्ता का सोचने और किसी घटना का विश्लेषण करने का तरीका सामान्य व्यक्ति से अलग होता है। यही विश्लेषणात्मक क्षमता उसे एक बेहतर कानूनी पेशेवर बनाती है।
जमीनी स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया को समझना एक अच्छे अधिवक्ता बनने के लिए बहुत जरूरी हैः न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के समापन समारोह में उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव ने आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की सराहना करते हुए मूट कोर्ट की प्रासंगिकता और अपने व्यावहारिक अनुभव छात्र-छात्राओं के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है और विधि के छात्र-छात्राओं की जिम्मेदारी है कि वे इन चुनौतियों को समझें तथा उनके समाधान खोजने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने मूट कोर्ट की समस्याओं और प्रस्तावों को जिला न्यायालयों की कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जिला न्यायालयों में उच्च न्यायालयों की तुलना में कहीं अधिक मुकदमे आते हैं। इसलिए जमीनी स्तर पर न्यायिक प्रक्रिया को समझना और आम नागरिक की समस्याओं से परिचित होना एक अच्छे अधिवक्ता बनने के लिए बेहद जरूरी है।
फल अधिवक्ता बनने के लिए नियमित अध्ययन, कई घंटों की मेहनत और निरंतर अभ्यास जरूरी हैः वरिष्ठ अधिवक्ता जयप्रकाश मिश्रा
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के दौरान डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलपति प्रोफेसर देवेंद्र सिंह ने प्रतियोगिता में देशभर की 32 टीमों की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर को राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब युवाओं का ध्यान कई बार गंभीर शैक्षणिक गतिविधियों से भटकता दिखाई देता है, ऐसे में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए उत्कृष्ट तर्क और उनकी तैयारी बेहद उत्साहजनक है। उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अरुण जेटली के व्यक्तित्व और विधि के क्षेत्र में उनके योगदान का स्मरण करते हुए छात्र-छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता जयप्रकाश मिश्रा ने वर्तमान विधि व्यवस्था में कुशल अधिवक्ताओं की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को अच्छे न्यायाधीशों के साथ ऐसे अधिवक्ताओं की भी जरूरत है, जिन्हें कानूनी प्रावधानों की गहरी समझ हो और जो तथ्यों के आधार पर प्रभावी ढंग से अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने विधि के पेशे में गुरु-शिष्य परंपरा और व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सफल अधिवक्ता बनने के लिए नियमित अध्ययन, कई घंटों की मेहनत और निरंतर अभ्यास जरूरी है।
सामाजिक सरोकारों, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी के साथ युवा अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ेंः प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान
स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के समापन समारोह के अंत में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए छात्र-छात्राओं को सामाजिक सरोकारों, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी के साथ अपने पेशेवर जीवन को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने मंचासीन अतिथियों, प्रतिभागियों, आयोजकों, फैकल्टी सदस्यों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की टीम ने जीता खिताब
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया। टीम में सुदीक्षा शर्मा, अपराजेय चौरसिया एवं मानवादित्य सिंह शामिल रहे। वहीं आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ मोहाली की टीम उपविजेता रही, जिसमें खुशिता गर्ग, पलवी जसरोटिया एवं वंशिका भारद्वाज ने सहभागिता की। दोनों टीमों ने उत्कृष्ट विधिक तर्कों, प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण और वकालत कौशल के माध्यम से निर्णायकों को प्रभावित किया। इस प्रकार राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समापन छात्र-छात्राओं के लिए ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा की महत्वपूर्ण उपलब्धि बनकर सामने आया। प्रतियोगिता के दौरान न्यायिक प्रक्रिया की बारीकियों को समझने, तर्कों को सशक्त बनाने और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने का अवसर मिला। समापन समारोह में अतिथियों के विचारों ने यह संदेश दिया कि एक सफल अधिवक्ता बनने के लिए केवल कानून का सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर अभ्यास, अनुभव, मेहनत, नैतिकता और समाज के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है।