आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ का हुआ शुभारंभ
- विधि के विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तर्कशक्ति और व्यावहारिक समझ विकसित करता है मूट कोर्टः न्यायमूर्ति राकेश सक्सेना
- एक अच्छे अधिवक्ता के लिए कानून की जानकारी के साथ अपने पक्ष को मजबूती और तार्किकता से प्रस्तुत करना भी जरूरी हैः अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश शुक्ला
- मूट कोर्ट की अवधारणा अन्य विषयों के छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी हो सकती हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
- मूट कोर्ट, छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व और पेशेवर दक्षता के विकास का महत्वपूर्ण माध्यमः डीन प्रोफेसर डाॅ. शोभा भारद्वाज
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ लाॅ द्वारा ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ का आयोजन संस्थान के सिथौली परिसर में हुआ। मूट कोर्ट प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मप्र हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति राकेश सक्सेना, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश शुक्ला, आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, स्कूल आफ लाॅ की डीन प्रोफेसर डाॅ. शोभा भारद्वाज सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर मौजूद रहे। वहीं इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सा से आए विधि छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों के साथ आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के छात्र-छात्राओं ने उत्साह से भाग लिया।
विधि के विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तर्कशक्ति और व्यावहारिक समझ विकसित करता है मूट कोर्टः न्यायमूर्ति राकेश सक्सेना
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ लाॅ द्वारा आयोजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं मप्र हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति राकेश सक्सेना ने कहा कि विधि की पढ़ाई केवल कानून की धाराओं और पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सफल अधिवक्ता बनने के लिए तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास, प्रभावी संवाद और न्यायालयीन परिस्थितियों का सामना करने का व्यावहारिक अनुभव भी आवश्यक है। मूट कोर्ट विद्यार्थियों को इन सभी गुणों को विकसित करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कानूनी पेशे में आत्मविश्वास अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्र-छात्राओं को अपने केस का सूक्ष्म अध्ययन करना चाहिए और उससे जुड़े प्रत्येक तथ्य एवं कानूनी पहलू को समझकर अपनी तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि न्यायालय में न्यायाधीशों के प्रश्नों और प्रतिप्रश्नों का तत्काल उत्तर देना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में धैर्य, शालीनता और प्रेजेंस ऑफ माइंड की अहम भूमिका होती है। विशेषकर आपराधिक मामलों में इन गुणों की आवश्यकता और बढ़ जाती है। उन्होंने थीसिस और एंटीथीसिस के उदाहरण से कानून की तार्किक प्रकृति तथा किसी विषय के विभिन्न पक्षों को समझाया। उन्होंने आईटीएम यूनिवर्सिटी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मूट कोर्ट छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास, तर्कशक्ति और न्यायालयीन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एक अच्छे अधिवक्ता के लिए कानून की जानकारी के साथ अपने पक्ष को मजबूती और तार्किकता से प्रस्तुत करना भी जरूरी हैः अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश शुक्ला
स्कूल आॅफ लाॅ द्वारा आयेाजित ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के शुभारंभ अवसर पर अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश शुक्ला ने मूट कोर्ट प्रतियोगिता को विधि छात्र-छात्राओं के लिए भविष्य के कानूनी पेशे का अभ्यास बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में छात्र-छात्राएं मुकदमे का गहन अध्ययन करने, तथ्यों और कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण करने तथा विपक्ष के तर्कों का प्रभावी जवाब तैयार करने की कला सीखते हैं। एक अच्छे अधिवक्ता के लिए कानून की जानकारी के साथ अपने पक्ष को मजबूती और तार्किकता से प्रस्तुत करना भी जरूरी है। मूट कोर्ट इसी क्षमता को विकसित करने का अवसर देता है।
मूट कोर्ट की अवधारणा अन्य विषयों के छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी हो सकती हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
स्कूल आॅफ लाॅ द्वारा ‘अरुण जेटली मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने कहा कि मेरा शैक्षणिक क्षेत्र प्रबंधन रहा है, लेकिन मूट कोर्ट की अवधारणा मुझे बेहद महत्वपूर्ण लगती है। इसमें छात्र-छात्राएं न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने के साथ अपने तर्कों को व्यावहारिक रूप से प्रस्तुत करना सीखते हैं। उन्होंने प्रबंधन शिक्षा में केस स्टडी के माध्यम से समस्याओं के विश्लेषण और समाधान खोजने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि मूट कोर्ट की अवधारणा अन्य विषयों के छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी हो सकती है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की यात्रा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वहां लॉ स्कूल और बिजनेस स्कूल एक ही परिसर में संचालित होते हैं। यह व्यवस्था विभिन्न शैक्षणिक विषयों के बीच सहयोग और अंतर्विषयक शिक्षा के महत्व को दर्शाती है।
मूट कोर्ट, छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व और पेशेवर दक्षता के विकास का महत्वपूर्ण माध्यमः डीन प्रोफेसर डाॅ. शोभा भारद्वाज
इससे पहले आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘अरुण जेटली ममोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026‘ के शुभारंभ अवसर पर स्वागत उद्बोधन देते हुए स्कूल आफ लाॅ की डीन प्रोफेसर डाॅ. शोभा भारद्वाज ने छात्र-छात्राओं को विधि व्यवयाय की वास्तविक चुनौतियों और जिम्मेदारियों के बारे में बातते हुए कहा कि कानून के क्षेत्र में सफलता के लिए केवल अकादमिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, इसके लिए व्यावहारिक समझ, तार्किक क्षमता, आत्मविश्वास और अपने पेशे के प्रति गंभीरता भी जरूरी है। उन्होंने मूट कोर्ट को छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व और पेशेवर दक्षता के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है।
वहीं उद्घाटन सत्र के समापन अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही स्कूल ऑफ लॉ को आश्वस्त किया कि आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में भविष्य में भी ऐसे अकादमिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा।