मन को भगवान में लगाना कठिन, अभ्यास और वैराग्य से ही संभव : रमेश भाई ओझा


दंदरौआ धाम में भागवत कथा का अंतिम दिन, स्वच्छता, संयम और आदर्श नेतृत्व पर दिए जीवन सूत्र

ग्वालियर। भगवान अपने भक्तों के अधीन हैं और प्रेमवश भक्तों के वश में रहते हैं। चंचल मन को भगवान में लगाना कठिन है, लेकिन अभ्यास और वैराग्य से इसे संभव बनाया जा सकता है। मन को न अतीत के दुखों में उलझना चाहिए और न भविष्य की चिंता में भटकना चाहिए, बल्कि प्रभु में स्थिर रखना चाहिए। ऐसा मन निर्मल और ताजा रहता है। संसार के मोह में बंधे मनुष्य को भगवान अपनी कृपा से बंधनों से मुक्त करते हैं। यह विचार संत रमेश भाई ओझा ने मंगलवार को दंदरौआ धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किए। 
कथा से होती है मन की सफाई
संत रमेश भाई ने कहा कि दिवाली नजदीक है। घरों में सफाई हो रही है और भागवत कथा के माध्यम से मन की सफाई हो रही है। जिस प्रकार कचरा साफ किए बिना रंगोली नहीं बनाई जा सकती, उसी प्रकार मन को निर्मल किए बिना उसमें भगवान को स्थान नहीं दिया जा सकता। मन की सफाई के लिए भागवत कथा से सुंदर कोई माध्यम नहीं है। कथा से जितनी आंतरिक शुद्धि होती है, उतनी तीर्थ यात्रा से भी नहीं होती। विडंबना यह है कि लोग तीर्थों में जाकर भी गंदगी फैलाते हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में स्वच्छता पर बहुत ध्यान दिया जाता है, लेकिन पवित्रता की उपेक्षा होती है। हमारे यहां पवित्रता पर जोर दिया जाता है, लेकिन स्वच्छता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। नदियों में साबुन से स्नान करने, कपड़े धोने और गंदगी फैलाने से बचना चाहिए। बड़े शहरों के गंदे नालों का पानी नदियों में नहीं मिलना चाहिए। जल और वायु को दूषित करना पाप है।
श्रद्धा के साथ विचार भी जरूरी
संत रमेश भाई ने कहा कि भागवत कथा श्रीकृष्ण का वाणी रूप है। कथा में विचारों के बीज बोए जाते हैं, जिनसे जीवन में उन्नत विचारों की फसल तैयार होती है। बिना विचार के श्रद्धा कभी अंधश्रद्धा बन सकती है। इसलिए श्रद्धा के साथ विचार और विचार के साथ श्रद्धा होना आवश्यक है। भगवान कृष्ण कानों के मार्ग से हृदय में प्रवेश कर मोरपंख की झाड़ू से मन की सफाई करते हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने से मनुष्य की तृष्णा मिटती है। भगवान की लीलाओं में मानव, असुर और देवता सभी के लिए सीख है। भगवान असुरों का वध कर उनका उद्धार करते हैं, जबकि देवताओं को परास्त कर उनका अभिमान तोड़ते हैं। मानव जीवन में अपनी लीलाओं के माध्यम से लोकशिक्षा देते हैं।
अति से बचना ही जीवन का संयम
संत रमेश भाई ने कहा कि मनुष्य को किसी भी चीज की अति नहीं करनी चाहिए। यदि आप अपने मित्र को बहुत देर तक गले लगाए रखेंगे, तो वह भी आपसे दूर हो सकता है। भोजन जैसे पोषक तत्व की अधिकता भी नुकसान पहुंचाती है। मनुष्य को प्राकृतिक व्यवस्था के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। प्रकृति के नियमों की अनदेखी जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
उन्होंने कहा कि बिना पात्रता के भक्ति मनुष्य को भोगी, ज्ञान नास्तिक और योग रोगी बना सकता है। चंचल मन पर नियंत्रण ही योग है, जो अभ्यास और वैराग्य से संभव है। पात्रता अर्जित करने के लिए गुरु की कृपा भी जरूरी है। भगवान की कृपा से मनुष्य का अहंकार दूर होता है और वह संसार के बंधनों से मुक्त होता है।
नेता वही, जो ध्येय की ओर ले चले
आदर्श नेतृत्व पर चर्चा करते हुए संत रमेश भाई ने कहा कि नेता वही है, जो लोगों को निश्चित ध्येय की ओर लेकर चले। विनोदपूर्ण शैली में उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को स्पीकर कहते हैं, लेकिन उन्हें सबसे कम बोलने का अवसर मिलता है। वे स्वयं मौन रहकर सभी को बोलने का मौका देते हैं, लेकिन उनकी बात कोई नहीं सुनता। विधानसभा अध्यक्ष के कथा में आने पर भी इस विषय में चर्चा हुई थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों में ऐसे नेता रहे हैं, जिनके लिए राष्ट्र प्रथम था। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिंह राव इसी श्रेणी के नेता थे। उन्होंने भाइयों के बीच बंटवारे का सरल तरीका बताते हुए कहा कि एक भाई बंटवारा करे और दूसरे से कहे कि दोनों हिस्सों में से जो अच्छा लगे, वह चुन ले। इससे भाइयों के बीच विवाद की आशंका कम हो जाती है।
 कथा यजमान अनूप मिश्रा बोल दंदरौ हनुमान जी की कृपा से हुआ स्वस्थ ---
कथा के यजमान एवं पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने कहा कि बीमारी के कारण वे वर्ष 2023 में चुनाव नहीं लड़ सके थे। उस समय जब वे दंदरौआ धाम दर्शन करने आते थे, तो पांच लोग उन्हें पकड़कर लाते थे। अब दंदरौआ हनुमान जी की कृपा से वे स्वयं को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि दंदरौआ महाराज में साक्षात प्रभु के दर्शन होते हैं। उन्होंने धाम में हुई तोड़फोड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारों ने भी महाराज को विचलित करने की कोशिश की, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय को नहीं तोड़ सकीं।
दंदरौआ महाराज ने स्वच्छता का बताया महत्व
दंदरौआ महाराज रामदास ने कहा कि भगवान राम ने भी दशहरा से दिवाली तक स्वच्छता अभियान चलाया था। इसी से प्रेरणा लेकर लोग दिवाली पर साफ-सफाई करते हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों और पुराणों में वर्णित प्रसंगों का संत रमेश भाई ओझा ने दंदरौआ धाम में सुंदर चित्रण किया।
इस अवसर पर श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामदास महाराज, महंत रामभूषणदास महाराज खनेता, महंत कालीदास महाराज तेजपुरा, संत अवधबिहारीदास, कथा यजमान एवं पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, गोहद विधायक केशव देसाई, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, रामबरन पुजारी, गिर्राज दुबे, केके शर्मा, सुदामा शर्मा, जलज त्रिपाठी, प्रदीप त्रिवेदी, अमन दैपुरिया, पवन शास्त्री, श्याम सुंदर सोनी और अनिल शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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