ग्वालियर। दूसरों की सुख-शांति और चैन छीनने वाला व्यक्ति कभी स्वयं शांति प्राप्त नहीं कर सकता। मनुष्य को जीवन में शांति का अनुभव संतों के सानिध्य से होता है, लेकिन इसके लिए अपने आचरण और कर्मों को भी शुद्ध रखना जरूरी है। यह विचार संत रमेश भाई ओझा ने दंदरौआ धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए।श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम दिवस आज मंगलवार को कथा सुबह 9:30 बजे से प्रारंभ होगी।
संत रमेश भाई ने कहा कि जिस प्राणी के मन में प्रेम है, वह सुंदर है। प्रेम दीपक की लौ के समान है, जबकि वासना धुएं की तरह है। उन्होंने सूर्पनखा का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भगवान राम को पाना चाहती थी, लेकिन उसके मन में प्रेम के स्थान पर वासना थी। इसी कारण उसे भगवान राम की प्राप्ति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लोग गुरु को तो मानते हैं, लेकिन उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते। गुरु के पास जाते समय संकल्प और दक्षिणा का भाव होना चाहिए। गुरु के आदेश को सुनकर उसका पालन करना चाहिए। साधु-संत वेदों और शास्त्रों के अनुसार धर्म का मार्गदर्शन करते हैं। उनके चरण पड़ने से घर पवित्र होता है, लेकिन इसके साथ अपने आचरण को शुद्ध रखना और कर्मों में सुधार करना भी जरूरी है।
संत रमेश भाई ने कहा कि ईश्वर को मानना या न मानना व्यक्ति की इच्छा है, लेकिन जीवन में धर्म के सिद्धांतों को अपनाना आवश्यक है। लोग धर्म सुनते तो हैं, लेकिन उसके अनुसार आचरण नहीं करते। उन्होंने श्रीमद्भागवत को सभी पुराणों में श्रेष्ठ बताते हुए प्रतिदिन कम से कम एक श्लोक का पाठ करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का पाठ अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि दो अहंकारी व्यक्ति एक-दूसरे की बात नहीं सुनते, बल्कि चाहते हैं कि सभी उनकी बात मानें। दूसरों की शांति भंग करने वाला व्यक्ति स्वयं भी चैन से नहीं रह सकता। इसलिए अहंकार छोड़कर प्रेम, सदाचार और संयम को जीवन में अपनाना चाहिए। कथा समापन के बाद भी श्रद्धालुओं को घर पर श्रीमद्भागवत का स्वाध्याय जारी रखना चाहिए।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर महंत रामदास महाराज, महंत कालीदास महाराज तेजपुरा, संत अवधबिहारी दास, मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, पूर्व मंत्री भगवान सिंह यादव, पूर्व मंत्री एवं कथा यजमान अनूप मिश्रा, अशोक जैन, समाजसेवी रामशंकर शर्मा, रामबरन पुजारी, गजेंद्र सिंह भदौरिया, जलज त्रिपाठी, प्रदीप त्रिवेदी, पवन शास्त्री, गोकुल परमार, अम्बरीष आचार्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।