स्मार्ट सिटी के इंजीनियर अधकचरे ज्ञान वाले, उनके सारे काम खराब
ग्वालियर। दीपावली पर शहर में खराब सड़कों और उड़ती धूल के कारण आम लोग, राहगीर और व्यापारी बेहद परेशान हैं। खंड खंड़ सड़कों पर भीड़ भरे बाजारों में आमजन दीपावली की खरीददारी में जुटे है। सड़कों पर फड़ लगाने वाले व्यापारी भी टूटी सड़कों और उड़ती धूल के बीच अपना व्यापार कर रहे हैं। यह सभी अव्यवस्था स्मार्ट सिटी की पोल खोल रही है।
ग्वालियर में दीपावली के त्योहार के दौरान खराब सड़कों और धूल-मिट्टी की यह स्थिति वाकई आम जनता, राहगीरों और छोटे व्यापारियों के लिए बेहद कष्टदायक और चिंताजनक है। त्योहारों के सीजन में जब बाजारों में भारी भीड़ होती है, तब इस तरह की बुनियादी अव्यवस्थाएं न केवल व्यापार को प्रभावित करती हैं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनती हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकास कार्यों का उद्देश्य शहर को बेहतर बनाना होता है, लेकिन समय पर काम पूरा न होने और धूल नियंत्रण के उपाय न किए जाने से जनता में नाराजगी है। उड़ती धूल से राहत देने के लिए व्यस्त बाजारों और टूटी सड़कों पर दिन में कम से कम दो से तीन बार पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। त्योहार के सीजन को देखते हुए भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में तुरंत गड्ढों को भरने का काम किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। टूटी सड़कों के कारण आए दिन जाम लगा रहता है।
झांसी रोड स्थित सचिन तेंदुलकर मार्ग और अन्य कई इलाकों में सड़कें लंबे समय से जर्जर हैं, जिनमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़कों से वाहनों के गुजरते ही धूल के गहरे गुबार उड़ते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आँखों में जलन और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। त्योहारी सीजन के बावजूद सड़कों की बदहाली और धूल के कारण लोग बेहद परेशान है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बाद भी सड़क निर्माण और मरम्मत का काम पूरा नहीं हो रहा है, जिससे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। हालांकि स्मार्ट सिटी के नवागत सीईओ टी. प्रतीक राव ने व्यवस्था सुधारने के प्रयास किये है, लेकिन जब तक इन इंजीनियरों को हटाया नहीं जायेगा तब तक स्मार्ट सिटी को यह इंजीनियर अपने कामों से बदनाम करते रहेंगे।