अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर देता है कथा सूर्य: संत रमेश भाई


दंदरौआ में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन

ग्वालियर। श्रीमद्भागवत महापुराण ऐसा कथा सूर्य है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर देती है। इसमें हजारों सूर्य का तेज एक साथ प्रकाशमान होता है। यह परमात्मा का ही बांग्मय स्वरूप है। यह विचार संत रमेशभाई ओझा ने दंदरौआ धाम में आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरूवार को व्यक्त किए।
 उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत जिस पंडाल में विराजमान हो जाती है, वो मंदिर हो जाता है। मंच गर्भग्रह, व्यासपीठ पीठिका बन जाती है। ये ऐसा ग्रंथ है जो श्रोताओं के साथ ग्रंथियों की भी ग्रंथियों को खोलकर गोविंद की भक्ति से परिपूर्ण कर देती है। उन्होंने कहा कि ी-पुरूष और नंपुसक सभी परमात्मा की ही रूप है। ग्रंथ पुल्ंिलग, संहिता स्त्रीलिंग और पुराण नपुंसक लिंग है, इसलिए लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। 

भागवत भगवान का ही स्वरूप.....
उन्होंने बताया कि भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। भागवत के पहले और दूसरे अध्याय में भगवान के चरण,तीसरे और चौथे अध्याय उनकी जंघाएं, पांचवा और छंठवे अध्याय भगवन की भुजाएं,सांतवा व आंठवा अध्याय भगवान का उदर और नाभि, नवमा अध्याय वक्षस्थल, दसवा ह्रदय, ग्यारहवां ललाट और 12 अध्याय उनका मस्तक है।
कथा नहीं सुनने वाले कान सर्प के बिल....
उन्होंने बताया कि जिसके कान भगवान की कथा नहीं सुनते हैं, उनके कान सर्प के बिल के समान हैं। कान से कथा नहीं सुनोगे तो वासना रूपी नागिन कान रूपी बिल में घुस जाएगी और जहां वासना प्रवेश कर गई, वहां भगवान की प्राप्ति कठिन हो जाती है।
संसार में रहो,संसार को अपने भीतर मत आने दो.....
उन्होंने कहा कि दुराचारी संसार जब हमारे भीतर प्रवेश कर जाता है तो मन दुखी रहता है,लेकिन जब हम मन में श्रीकृष्ण को बसा लेते हैं तो मन आनंद स्वरूप हो जाता है। उन्होंने उदाहहण देते हुए बताया कि नौका समुद्र में रहे तो ठीक,लेकिन यदि समुद्र नौैका में आ जाए, तो उसका डूबना तय है। इसी प्रकार आप संसार में रहो,लेकिन संसार को अपने अंर्तमन में प्रवेश मत करने दो। इसलिए जब कथा सुनने का अवसर मिले तो कभी मत छोड़ो।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम हर रोज भोजन करते हैं, उसी प्रकार नित्य सत्संग भी करना चाहिए। महादेव-पार्वती भी नित्य श्रीहरि का ध्यान करते हैं। जिस तरह माताएं रोज घर का कचरा साफ करती हैं, उसी तरह हमें कथा सत्संग के माध्यम से मन की सफाई करनी होगी, अन्यथा मन के भीतर कचरा एकत्रित हो जाएगा।

संत रमेश भाई ओझा ने कहा कि मैंने जो आचार्यों से सुना और सीखा। उसमें से जितना मेरी अंजुरी में आया, तो मैं आपको परोस रहा हूं,लेकिन सच यह है कि इतने साल में अभी में सीढ़ियों पर ही चल रहा हूं। भीतर प्रवेश नहीं कर पाया हूं। भागवत ऐसा अद्भुत ग्रंथ है जिसे समझने के लिए अनंत जन्म लेने पड़ेंगे।
उन्होंने बताया किश्रीकृष्ण तो बांयी ऊंगली पर गिर्राज उठाकर गिर्राजधरण कहलाए,लेकिन हनुमानजी ने भी पर्वत उठाया,लेकिन वे गिरवर नहीं कहलाए। जबकि दोनों ने ही पर्वत उठाकर रक्षा की। श्रीकृष्ण ने ब्रजबासियों एवं हनुमानजी ने लक्ष्मणजी के प्राणों की रक्षा की।

इस मौके पर दंदरौआ के महामंडलेश्वर रामदास महाराज, कथा यजमान अनूप मिश्रा. मंहत कालिदास तेजपुरा, महंत अवध बिहारीदास, केबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला, कथा यजमान अनूप मिश्रा , समाजसेवी रामशंकर शर्मा, भागीरथ सिंह गुर्जर, रामबरन पुजारी,देवेश शर्मा. जलज त्रिपाठी, बृजकिशोर शर्मा ,पवन शास्त्री , प्रदीप त्रिवेदी, अमन दैपुरिया, देवेंद्र व्यास, नरेंद्र चौधरी, वीरेंद्र राणा सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

posted by Admin
12

Advertisement

sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
Get In Touch

Padav, Dafrin Sarai, Gwalior (M.P.)

98930-23728

sandhyadesh@gmail.com

Follow Us

© Sandhyadesh. All Rights Reserved. Developed by Anuj Mathur

<1-------Google-aNALY-------->