दलित आदिवासी महापंचायत ने आवासीय भत्ता व छात्रवृत्ति निकालने का लगाया आरोप
ग्वालियर। अशासकीय इंस्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल एंड टेक्नीकल एज्यूकेशन महाविद्यालय पिपरौली से बीएड कर चुके छात्रों की छात्रवृत्ति में गोलमाल कर उन्हें मार्कशीट देने में आनाकानी की जा रही है। यह आरोप दलित आदिवासी महापंचायत मप्र के कार्यकारी प्रांतीय अध्यक्ष महाराज सिंह राजौरिया ने लगाया है।
राजौरिया ने रविवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि आवासीय छात्रावास में रह रहे आदित्य राजौरिया, रितिक छिरोलिया, मनीष वर्मा के नाम पर दूसरे खातों में आवासीय भत्ता व छात्रवृत्ति की राशि भेजकर फर्जी तरीके से निकाल ली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर उक्त संस्था की जांच कराई जाए तो फर्जी किरायानामा, परिवार आईडी, शपथपत्र लगाकर जनजातीय कार्य विभाग के नोडल अधिकारी, बैंक मैनेजर ने लाखों रुपए का भ्रष्टाचार किया है। राजौरिया का आरोप है कि मार्कशीट व मूल दस्तावेज देने के बदले प्रत्येक छात्र से एक-एक लाख रुपए की मांग की जा रही है। वहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी के चलते जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों का प्रबार चहेतों को दे दिया गया है। आदिवासी कन्या आश्रम आरोन, हरसी, मोहना, घाटीगांव में शिक्षकों की कमी के चलते अध्यापन कार्य लगभग ठप पड़ा है। पत्रकारवार्ता में महापंचायत के संस्थापक संरक्षक जबरसिंह अग्र, दारा सिंह कटारे भी मौजूद थे। संबंधित अधिकारियों को जल्द ही सरकार निलंबित करे।