UPI व्यापारिक लेनदेन पर MDR को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए : MPCCI
ग्वालियर । भारत सरकार द्वारा रु. 2 हजार से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4% MDR को दीपावली त्यौहार को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया है, जबकि इसे पूर्ण रूप से समाप्त किए जाने की आवश्यकता है । इस बात का उल्लेख करते हुए आज “म. प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री, ग्वालियर” द्वारा केन्द्रीय वित्तमंत्री-माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक पत्र प्रेषित किया गया है ।
MPCCI द्वारा केन्द्रीय वित्तमंत्री को प्रेषित पत्र में उल्लेख किया गया है कि यूपीआई से व्यापारिक भुगतान पर 0.4% MDR को अल्प समय के स्थान पर हमेशा के लिए पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए क्योंकि यह व्यवस्था देश के करोड़ों छोटे-छोटे व्यवसाईयों के ऊपर आर्थिक भार स्वरूप होने के साथ-साथ इसका प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव कम मार्जिन वाले व्यापार पर पड़ेगा । वर्तमान में व्यापार विभिन्न प्रकार की लागत एवं प्रतिस्पर्धात्मक दबावों से प्रभावित है । ऐसी स्थिति में कारोबारियों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाना, औचित्यहीन होने के साथ-साथ इससे कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वभाविक है, जो कि देश की जीडीपी के लिए निश्चित ही नकारात्मक कदम होगा ।
अध्यक्ष-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष-सुरेश बंसल, उपाध्यक्ष-संदीप नारायण अग्रवाल, मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-दीपक पमनानी एवं कोषाध्यक्ष-मनोज अग्रवाल ने कहा है कि UPI को भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति का आधार बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि यह केवल भुगतान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश के डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा बन चुका है । इसलिए बगैर किसी अतिरिक्त शुल्क के इसकी लागत संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिससे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहे । साथ ही, देश में डिजिटल भुगतान को और अधिक मजबूत करने के लिए UPI को कारोबारियों के लिए अधिकाधिक सरल, पारदर्शी एवं कम लागत वाला बनाए रखना देश के व्यापक आर्थिक हित में होगा ।
पदाधिकारियों ने पुरजोर माँग की है कि UPI व्यापारिक लेनदेन पर प्रस्तावित MDR को पूर्णतः समाप्त किया जाए, ताकि देश के छोटे-छोटे व्यापारियों को इससे पड़ने वाले आर्थिक भार से मुक्ति मिल सके ।