ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के लगभग 50 विद्यार्थियों ने सोमवार को श्रीकृष्णायन आदर्श गौशाला, लाल टिपारा, मुरार का शैक्षणिक भ्रमण किया।भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन, गोबर आधारित जैव-संपीडित प्राकृतिक गैस (CBG) संयंत्र, जैविक खेती, सघन वन तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों का गहन अवलोकन किया।
विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. दिलीप कुमार के नेतृत्व में यह दल गौशाला पहुँचा। इस अवसर पर निर्णय लिया गया कि विद्यार्थी अपने भ्रमण के आधार पर एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट तैयार करेंगे। यह रिपोर्ट गौ-आधारित अर्थव्यवस्था और सतत विकास पर शोध के लिए विश्वविद्यालय और गौशाला दोनों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।श्रीकृष्णायन आदर्श गौशाला भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जहाँ परंपरागत मूल्यों, आधुनिक विज्ञान और सतत विकास का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। विद्यार्थियों ने यहाँ स्वच्छ ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास की व्यावहारिक संभावनाओं को समझा। इस अवसर पर विद्यार्थियों को ‘दीक्षारंभ से शिक्षा का प्रारंभ’ की अवधारणा से भी अवगत कराया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे प्रकृति, संस्कृति, सेवा और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना है। साथ ही विद्यार्थियों को आगामी ‘सतत कुंभ 2026 — सतत विश्व के निर्माण हेतु’ पहल के बारे में भी जानकारी दी गई, जो सतत संसाधन, कृषि, संस्कृति, नवाचार, तकनीक, स्वास्थ्य और आरोग्य को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है।