धर्म की रक्षा में पिता ,पुत्रों का बलिदान गुरु गोविंद सिंह जी ने दिया- हिंदू महासभा

हिन्दू महासभा भवन में गुरु गोविंद सिंह जी के चित्र का लोकार्पण                                                        ग्वालियर  अखिल भारत हिंदू महासभा जिला ग्वालियर द्वारा आज खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह जी के 318 वां बलिदान दिवस पर हिंदू महासभा भवन में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए एवं उनके चित्र का हिंदू महासभा भवन में लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ जयवीर भारद्वाज थे । कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू सैन की। कार्यक्रम का संचालन जिला उपाध्यक्ष ब्रह्म दत्त पांडे शास्त्री, हेमराज जाटव ने किया। मुख्य अतिथि आसन्न से डॉ. जयवीर भारद्वाज ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी ने धर्म के लिए अपने पिता एवं सिख धर्म के नवें गुरु तेग बहादुर जी को एवं गुरु गोविंद सिंह जी के चारों पुत्रों को बलिदान धर्म की रक्षा में बलिदान हो गए। गुरु गोविंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की। 19 वर्ष की उम्र में गुरु गोविंद सिंह ने भागिनी की लड़ाई में फतेह खान, भीमचंद और शिवलिंग पहाड़ियों के राजाओं की संयुक्त तीनों सेनाओं को हराया था गुरु देव गोबिंद सिंह जी ने नारा दिया। "जो बोले सो निहाल,सत श्री अकाल, वाहेगुरु दा खालसा, वाहेगुरु की फतेह"। आज सिख समाज उनके बताए हुए नारे को जन-जन तक पहुंचाया । गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा था कि योद्धा बनो और संत बानो, प्रेम की शक्ति, मानवता की सेवा,सब बराबर है विनम्र रहे, आदर्श मानव बनें , अपनी वाणी पर ध्यान दें उनके संदेश आज भी सभी को प्रेरित करते हैं । गुरु जी को 7 अक्टूबर 1708 में गुरु जी को नांदेड़ महाराष्ट्र में जमशेद खान नमक पठान ने चाकू मार कर हत्या कर दी थी। गुरु गोविंद सिंह जी साहस ,भक्ति और नेतृत्व की मिसाल थे । आभार रामबाबू शर्मा ने माना । 

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