आईटीएम यूनिवर्सिटी में ‘फार्मास्युटिकल शिक्षा और कॅरियर में लैंगिक समानता‘ विषय पर एक्सपर्ट टाॅक का हुआ आयोजन
- महिलाओं का योगदान फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नवाचार, नेतृत्व और संगठनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैः डाॅ. नीति जैन
- स्वतंत्र चयन का सम्मान व्यक्ति की गरिमा, आत्मविश्वास और समानता को बढ़ावा देता हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
- समानता और समता दोनों ही एक समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैंः एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. गीतांजलि सुरंगे
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में स्कूल आॅफ फार्मेसी द्वारा ‘फार्मास्युटिकल शिक्षा और कॅरियर में लैंगिक समानता‘ विषय पर एक्सपर्ट टाॅक का आयोजन किया गया। संस्थान के मधुलिमये सभागार में आयोजित एक्सपर्ट टाॅक में डीआरडीओ, डीआरडीई ग्वालियर के संयुक्त निदेशक डाॅ. नीति जैन बतौर एक्सपर्ट शामिल हुईं। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग से एसोसिएट प्रोफेसर और महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ की संयोजक डाॅ. गीतांजलि सुरंगे, स्कूल आफ फार्मेसी के एसोसिएट डीन डाॅ. अवनीश त्रिपाठी, एचओडी नेम कुमार जैन, काॅर्डिनेटर असिस्टेंट प्रोफेसर, डाॅ. नमृता मिश्रा, असस्टिेंट प्रोफेसर निशा वर्मा सहित विभागाध्यक्ष, डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
महिलाओं का योगदान फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नवाचार, नेतृत्व और संगठनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैः डाॅ. नीति जैन
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में स्कूल आफ फार्मेसी द्वारा आयोजित एक्सपर्ट टाॅक में बतौर एक्सपर्ट शामिल हुईं डीआरडीओ, डीआरडीई ग्वालियर की संयुक्त निदेशक डाॅ. नीति जैन ने फार्मास्युटिकल उद्योग में लैंगिक समानता की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है, लेकिन उच्च नेतृत्व के क्षेत्र में विद्यमान लैंगिक अंतर को दर्शाती है। उन्होंने समान अवसर, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया, समान वेतन, मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग, नेतृत्व प्रशिक्षण और महिलाओं के अनुकूल कार्यस्थल नीतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रेशमा केवलरामणी, विनिता गुप्ता, नमिता थापर एवं किरण मजूमदार जैसी सफल महिलाओं के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि महिलाओं का योगदान फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नवाचार, नेतृत्व और संगठनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्थानों एवं संगठनों से महिलाओं के व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करने का आव्हान किया।
स्वतंत्र चयन का सम्मान व्यक्ति की गरिमा, आत्मविश्वास और समानता को बढ़ावा देता हैः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
एक्सपर्ट टाॅक के अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने स्वतंत्र चयन एवं लैंगिक समानता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी लैंगिक भेदभाव के अपने व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। पुरुष एवं महिला दोनों को अपनी रुचि, क्षमता और योग्यता के आधार पर शिक्षा, कॅरियर, जीवनशैली तथा उपलब्ध अवसरों का चयन करने का समान अधिकार होना चाहिए। स्वतंत्र चयन का सम्मान व्यक्ति की गरिमा, आत्मविश्वास और समानता को बढ़ावा देता है और सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
समानता और समता दोनों ही एक समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैंः एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. गीतांजलि सुरंगे
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित एक्सपर्ट टाॅक के अवसर पर एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. गीतांजलि सुरंगे ने समानता एवं समता, न्यायसंगत समानता के बीच अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि समानता का अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना समान अधिकार, अवसर एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। वहीं समता का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं, परिस्थितियों और मौजूद बाधाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सहयोग एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि सभी को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि जेंडर समानता में सभी को समान अधिकार एवं अवसर प्रदान किए जाते हैं, जबकि जेंडर इक्विटी मौजूदा सामाजिक एवं व्यक्तिगत बाधाओं को पहचानकर आवश्यक सहयोग प्रदान करने पर केंद्रित होती है। इस प्रकार समानता और समता दोनों ही एक समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।