ग्वालियर। नगर निगम इस सीजन में 125 वाटर हार्वेस्टिंग करने जा रह है, अभी तक 20 वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि 50 में अभी काम चल रहा है। इन वाटर हार्वेस्टिंग से करोड़ों लीटर पानी का संग्रह किया जा सकेगा। अधिकांश वाटर हार्वेस्टिंग ऐसे स्थानों पर की जा रही है, जहां पर पानी का बहाव अधिक रहता है। हरीशंकर पुरम पार्क, गणेश पार्क, आनंद नगर बड़ा पार्क एवं ग्रामीण क्षेत्र के वार्ड 61 में की गई वाटर हार्वेस्टिंग का अपर आयुक्त टी प्रतीक राव ने निरीक्षण किया और नोडल अधिकारी राकेश कश्यप को कार्य तेज गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
नोडल अधिकारी राकेश कश्यप ने बताया कि नगर निगम इस बार तकरीबन 100 से अधिक पार्कों एवं ऐसे स्थान जहां जलभराव अधिक होता है, वहां पर जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग कर रहा है। इसके लिए तकरीबन 60 फीट बोरिंग कर पाइप को डाला जा रहा है, इसके बाद बोरिंग के आसपास पिट बनाई जा रही है, जिसमें पानी की आवक के लिए कई जगह दी जा रही है, साथ ही ऊपर जाली लगाई जा रही है, जिससे वाटर हार्वेस्टिंग में कचरा एवं पॉलीथिन नहीं जाए। इसके बाद इसमें गिट्टी, कोयला एवं बजरी भरकर इसे पानी का संग्रहण करने के लिए तैयार किया जा रहा है। कश्यप ने बताया कि इस साल 125 वाटर हार्वेस्टिंग करने का टारगेट है, प्रत्येक वाटर हार्वेस्टिंग में 80000 रुपए का खर्च आ रहा है। तकरीबन 1 करोड़ की लागत से शहर में वाटर हार्वेस्टिंग कराई जा रही है जिससे जल संरक्षण हो सके। निरीक्षण के दौरान कार्य पालन यंत्री श्रीकांत काँटे, रजनीश गुप्ता, अजय शर्मा एवं सम्बन्धित क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी उपस्थित रहे।
नगर निगम सीमा में निचले इलाकों में हर साल बारिश के मौसम में जल भराव की स्थिति बनती है। जिससे आमजनों को परेशानी होती है। इस समस्या को हल करने के लिए निचले इलाकों में वाटर हार्वेस्टिंग की जा रही है, जिससे यहां पर जमा होने वाले बारिश के पानी को अवसर के रूप में परिवर्तित कर जल संरक्षण किया जा सके। निरीक्षण के दौरान लापरवाही मिलने पर अपर आयुक्त श्री टी प्रतीक राव ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत कराए जा रहे रेन वॉटर हार्वेस्टिंग निर्माण कार्य हेतु समस्त क्षेत्राधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए। जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत कराए जा रहे रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट निर्माण कार्य न किए जाने के संबंध में समस्त उद्यान पर्यवेक्षकों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए।