जोर पकड़ते चेंबर चुनाव, लेकिन क्रियेटिव के आका व्हाईट के मुकाबले ठंडे
- न बैठक कर रहे, न कार्यालय खोला, प्रत्याशी रामभरोसे
ग्वालियर। मप्र चेंबर आफ कामर्स एंड इण्डस्ट्रीज के चुनावों में अब व्हाईट हाउस से लेकर क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशी लगातार चेंबर के सदस्यों से अधिकाधिक संपर्क कर रहे हैं। बैठकें कर रहे है और सामाजिक समारोहों में उन्होंने भागीदारी भी बढ़ा दी है, लेकिन अभी भी चेंबर के सदस्य व्यापारियों का रूख क्लीयर नहीं है। इस पर अध्यक्ष पद के स्वतंत्र प्रत्याशी व निवर्तमान अध्यक्ष डा. प्रवीण अग्रवाल भी अपने समर्थकों के साथ चुनाव का माहौल अपने पक्ष में करने के लिये ऐढ़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। हालांकि अभी चेंबर में प्रत्याशियों की संख्या नामांकन वापिसी के उपरांत ही तय होगी।
लेकिन इतना जरूर है कि व्हाईट हाउस और क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशी संपर्क में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। इसमें व्हाईट हाउस के प्रत्याशी अपने कोर ग्रुप के आकाओं के मार्गदर्शन में चुनाव का माहौल अपने पक्ष में करने को हरसंभव जोर लगा रहे हैं। हालांकि अभी कई पदों पर क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशी लगातार संपर्क कर अपनी मजबूत पकड़ बना चुके है। इसमें संयुक्त अध्यक्ष प्रत्याशी सुरेश बंसल, उपाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल से लेकर सचिव प्रत्याशी राकेश अग्रवाल रोम कम्प्यूटर अपने अपने तरीकों से प्रचार में है। वहीं सहसचिव प्रत्याशी राकेश अग्रवाल श्रीराम गारमेंट, संयुक्त अध्यक्ष प्रत्याशी सुरेश बंसल की कृपा के सहारे हैं।
लेकिन क्रियेटिव के आका घर बैठे
इधर चेंबर के कई व्यापारियों का कहना है कि चेंबर चुनावों में क्रियेटिव हाउस और व्हाईट हाउस के आकाओं की आपसी मित्रता हाबी है। इसी कारण क्रियेटिव के विजय गोयल से लेकर राधेश्याम भाकर, महेश मुदगल, हेमंत गुप्ता, मयंक गर्ग, राधाकिशन खेतान प्रचार को नहीं निकल रहे हैं और न ही इन्होंने प्रत्याशी घोषित करने के बाद कोई बैठक भी नहीं की हैं। जिसके कारण क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशी अपनी स्वयं की मेहनत व अपने बूते पर ही चुनाव लड़ने को मजबूर है। केवल मुकेश अग्रवाल जरूर अपने वैश्य महार सम्मेलन के जिलाध्यक्ष व कोषाध्यक्ष प्रत्याशी अजय के लिये जोर लगा रहे हैं।
इसी क्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि क्रियेटिव हाउस अपना अभी तक चुनाव कार्यालय ही नहीं खोल पाया है, जिससे क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशियों की संयुक्त प्लानिंग पर काम ही नहीं हो पा रहा है। अभी संयुक्त अध्यक्ष प्रत्याशी सुरेश बंसल और उपाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल तो अपनी सेटिंग व रणनीति से बेहतर पोजीशन में आ रहे हैं, तो सहसचिव प्रत्याशी राकेश अग्रवाल श्रीराम गारमेंट ने संयुक्त अध्यक्ष प्रत्याशी सुरेश बंसल का पल्लू पकड़ लिया हैं वह सुरेश बंसल के सहारे चेंबर चुनावों की बैतरणी पार करने का ख्वाब देख रहे हैं।
यहां यहा भी स्पष्ट करना होगा कि सचिव पद प्रत्याशी राकेश अग्रवाल रोम कम्प्यूटर भी अकेले अपने बूते पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें उम्मीदवार तो क्रियेटिव हाउस के आकाओं ने बना दिया, लेकिन यह आका उनके साथ को आगे नहीं आये है। वह तो राकेश अग्रवाल अपने सामाजिक, व्यापारिक नेटवर्क से मजबूत हैं और अभी हाल ही में बड़े आयोजन कर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा भी चुके हैं, इसीलिये उन पर चेंबर सदस्य फिदा है और प्रभावित भी हैं। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि क्रियेटिव हाउस के दिग्गज यदि मैदान में नहीं उतरे तो आगे व्हाईट हाउस व स्वतंत्र उम्मीदवार बाजी उलट सकते हैं।
व्हाईट हाउस की रणनीति
अब व्हाईट हाउस की बात करें तो उनकी रणनीति स्पष्ट है, पारस जैन को अध्यक्ष पद पर उतारकर चुनाव उनके गले की फांस बन गया हैं। क्रियेटिव हाउस का अध्यक्ष प्रत्याशी न आने से व्हाईट हाउस का अध्यक्ष पद पर निवर्तमान अध्यक्ष व स्वतंत्र उम्मीदवार डा. प्रवीण अग्रवाल से सीधा मुकाबला फंसा हुआ है। यहां व्हाईट हाउस व क्रियेटिव हाउस के आकाओं ने रणनीतिकर क्रियेटिव का प्रत्याशी अध्यक्ष पद पर नहीं उतारा, यही कारण अब व्हाईट हाउस के गले की फांस बन गया है। यदि प्रत्याशी उतरा होता तो व्हाईट हाउस अध्यक्ष पद पर निर्णायक स्थिति में होता और उसे त्रिकोणात्मक संघर्ष का लाभ मिलता। अब स्वतंत्र उम्मीदवार डा. प्रवीण अग्रवाल ने चुनावी मुकाबला साबित कर दिया है। डा. प्रवीण अग्रवाल और पारस जैन के मुकाबले पर सबकी निगाह है।
व्हाईट के नेता एकजुट
इधर व्हाईट हाउस की तारीफ करनी होगी उसके नेता अपने प्रत्याशियों को लेकर एकजुट हैं जिसमें कोर ग्रुप सर्वेसर्वा अरविंद अग्रवाल मैदान में आकर पूरी कमान सम्हाल रहे है। वह पारस जैन की बिल्डिंग ओरचिव टावर में रोज अपना कामकाज छोड़कर बैठ रहे हैं। जिसमें प्रशांत गंगवाल भी भविष्य के चुनावों के लिये चेंबर की राजनीति का क, ख, ग सीख रहे हैं। यहां ओरचिड में अध्यक्ष प्रत्याशी पारस जैन से लेकर संयुक्त अध्यक्ष प्रत्याशी डा. विनोद जैन, उपाध्यक्ष प्रत्याशी सुनील अग्रवाल सन्नी, सचिव प्रत्याशी दीपक अग्रवाल, सहसचिव प्रत्याशी दीपक पमनानी व कोषाध्यक्ष प्रत्याशी मनोज अग्रवाल बाबा नियमित देररात जुटते है और अगली रणनीति भी तय करते है। आज भी ओरचिड में कई समूहों की बैठक लेकर अरविंद अग्रवाल ने उनका मन व्हाईट हाउस के लिये टटोला। इसमे विशेष बात यह है कि व्हाईट हाउस के लिये पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र गंगवाल से लेकर कुलवीर भारद्वाज और अजय बंसल भी रणनीति में लगे है। लगे भी क्यों न हो क्योंकि व्हाईट हाउस की प्रतिष्ठा जो बचानी हैं।