भगवान जगन्नाथ एकांतवास में गए, 15 दिन बाद देंगे दर्शन

ग्वालियर। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सोमवार को शहर में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा विधिवत संपन्न हुई। थाटीपुर स्थित कृष्णायन वैंकट हॉल में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र का 108 पवित्र कलशों से भव्य अभिषेक किया गया। इसके बाद विग्रहों को रेलवे स्टेशन स्थित मानिक विलास कॉलोनी ले जाया गया, जहां भगवान 15 दिन के एकांतवास में रहेंगे। 
मान्यता है कि विशाल स्नान के बाद भगवान को ज्वर आ जाता है। इसे ज्वर लीला कहा जाता है। एकांतवास के दौरान वैद्य भगवान को नीम की गोलियां, काढ़ा, फलों का रस, खिचड़ी और दलिया अर्पित कर सेवा करेंगे। इस अवधि में मंदिर के पट बंद रहेंगे और सामान्य भक्तों को दर्शन नहीं होंगे। भगवान 15 जुलाई को भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद 18 जुलाई को शहर में भगवान जगन्नाथजी की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इधर, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर नगर के प्रमुख मंदिरों में ठाकुरजी का विशेष शृंगार किया गया। सनातन धर्म मंडल, श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर जनकगंज, फलका बाजार और द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान को खीर-पूड़ी समेत विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया गया। मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन हुए। ज्योतिषाचार्य के अनुसार पूर्णिमा तिथि 29 जून सुबह 3.06 से 30 जून सुबह 5.26 तक रही। उदयातिथि के अनुसार स्नान-दान 29 जून को किए गए। इसी दिन विवाहित महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत भी रखा।
इसलिए आता है भगवान जगन्नाथ को ज्वर
इस्कॉन मंदिर दौलतगंज में रविवार को श्रीस्नान यात्रा महोत्सव की दिव्य महिमा पर विशेष आध्यात्मिक उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें इस्कॉन मप्र के क्षेत्रीय सचिव प्राणेश्वर प्रभुजी ने स्नान पूर्णिमा महोत्सव की कथा सुनाते हुए बताया कि इसकी शुरुआत सर्वप्रथम जगन्नाथ पुरी से हुई। तबसे यह इस्कॉन द्वारा पूरे विश्व में मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र का पवित्र नदियों के जल, सुगंधित द्रव्यों, फलों के रस, दूध, दही, शहद से भगवान का अभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि इतने विशाल स्नान के बाद भगवान को ज्वर आ जाता है। इसलिए उन्हें लगभग 15 दिनों के लिए विश्राम कक्ष में रखा जाता है, जहां केवल सेवायत उनकी सेवा करते हैं। इस अवधि में भगवान सामान्य भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं।

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