मित्रता हो तो श्री कृष्ण और सुदामा जैसी,*प्रत्येक मनुष्य को श्री कृष्ण की तरह मित्रता निभानी चाहिए- पंडित मनीष शास्त्री

ग्वालियर 12 जून शुक्रवार को  सिटी सेंटर स्थित कैलाश नगर में मनकापुर माता मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवे विश्राम दिवस पर भागवत आचार्य श्री पंडित मनीष कृष्ण शास्त्री ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया सुदामा संसार के सबसे अनोखे भक्त रहे वह जीवन में जितने गरीब नजर आए उतने वे मन से धनवान थे उन्होंने अपने सुखों और दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया 
 था जब सुदामा श्री कृष्ण से मिलने आए तो भगवान ने फटे कपड़े नहीं देखे बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा अगर सच्चा मित्र है तो श्री कृष्णा और सुदामा की तरह होना चाहिए जीवन में मनुष्य को श्री कृष्ण की तरह मित्रता निभानी चाहिए सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र की परेशानियों को समझे और बिना बताए मदद करें परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है तब तक मित्रता रहती है जब स्वार्थ पूरा हो जाता है मित्रता खत्म हो जाती है और जब महाराज श्री ने भजन गाए श्यामा प्यारी कुंज बिहारी, कथा स्थल पर बैठे श्रोताओं ने जमकर नाचे तत्पश्चात जब सुदामा श्री कृष्ण जी को मिलने द्वारकाधीश पहुंचे आचार्य कथा व्यास ने जब भजन गाया अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो दर पे सुदामा गरीब आ गया है‌ जब श्री कृष्ण जी को मालूम हुआ तो स्वयं श्री कृष्ण अपने मित्र सुदामा को महल से बाहर खुद लेने आए और लेकर अंदर महल में गए और अपने मित्र को अपने सिंहासन पर बिठा कर उनके चरणों में नीचे बैठ गए भगवान कृष्ण ने अपने आंसुओं से मित्र के पैर धोए पैर में लगे कांटे निकाले भगवान ने सुदामा को छप्पन भोग खिलाया और स्वयं ने सुदामा के चावल प्रसाद के रूप में खाए भगवान की झांकी देखकर भक्त भाव विभोर हो गए तत्पश्चात आचार्य जी ने श्रीमद् भागवत कथा का सातों दिन का सार सुनाया तत्पश्चात कथा स्थल पर फूलों की होली खिलाते हुए भजन गाया तो सभी श्रद्धालु झूम-झूम कर नाचने गाने लगे श्रीमद् भागवत कथा की आरती बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं उतारी गई कैलाश नगर के क्षेत्रीय निवासी एवं भक्तों ने मनीष शास्त्री जी का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया कथा को विराम दिया गया

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