आईटीएम ग्वालियर में पाॅक्सो अधिनियम पर विशेष व्याख्यान का हुआ आयोजन
- बाल संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी हैः डाॅ. संदीपा मल्होत्रा
- आईटीएम ग्वालियर शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और नैतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत हैः डाॅ. मेघा लहाने
ग्वालियर । आईटीएम ग्वालियर के महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ (वूमेन इंपाॅवरमेंट सेल) द्वारा पाॅक्सो अधिनियम के तहत ‘बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण-प्रवेशी लैंगिक हमला‘ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। संस्थान के अरुणा आसफ अली सेमिनार हाॅल सिथौली परिसर में आयोजित इस विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ. संदीपा मल्होत्रा (अध्यक्ष परिवार कल्याण समिति, शिक्षाविद् एवं पूर्व अध्यक्ष बाल कल्याण समिति महानगरीय न्यायिक पीठ) शामिल हुईं। इस अवसर पर आईटीएम डब्ल्यूईसी की चेयरपर्सन डाॅ. मेघा लहाने, कार्यक्रम कोर्डीनेटर डाॅ. प्रभा दीक्षित, डाॅ. प्रियूषा नरवरिया, डाॅ. प्रीति सिंह, रवि मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और छात्र-छात्राएं विशेष रूप से मौजूद रहे।
बाल संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी हैः डाॅ. संदीपा मल्होत्रा
आईटीएम ग्वालियर के डब्ल्यूईसी द्वारा आयोजित इस विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ. संदीपा मल्होत्रा ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बाल संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न अथवा दुव्र्यवहार की पहचान समय रहते करना और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों, अभिभावकों एवं संस्थानों को बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए उनकी सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों को पॉक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक और संस्था का कानूनी दायित्व है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के हितों की रक्षा के लिए गोपनीयता, सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि जागरूकता ही बाल शोषण की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग रहेगा, तो एक सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आव्हान किया कि वे बाल अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें, जागरूकता फैलाएं तथा बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
आईटीएम ग्वालियर शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और नैतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत हैः डाॅ. मेघा लहाने
आईटीएम ग्वालियर में आयोजित इस विशेष व्याख्यान में डब्ल्यूईसी की चेयरपर्सन डाॅ. मेघा लहाने ने मुख्यवक्ता डॉ. संदीपा मल्होत्रा के प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मल्होत्रा द्वारा साझा की गई जानकारी ने प्रतिभागियों को न केवल पॉक्सो अधिनियम और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी पहलुओं की गहन समझ प्रदान की, बल्कि बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सजगता के महत्व को भी प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस व्याख्यान से प्राप्त ज्ञान प्रतिभागियों को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा। डॉ. लहाने ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय सहभागिता और उत्साह ने कार्यक्रम को सार्थक एवं प्रभावशाली बनाया। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम न केवल कानूनी जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और जागरूक नागरिकता की भावना को भी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि आईटीएम ग्वालियर शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और नैतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। बाल अधिकारों, महिला सुरक्षा एवं सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम संस्थान की सामाजिक एवं कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को सशक्त बनाते हैं तथा विद्यार्थियों को जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सवाल-जवाब सत्र का हुआ आयोजन
आईटीएम ग्वालियर के डब्ल्यूईसी द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान के अंत में सवाल-जवाब सत्र का भी आयोजन किया गया। जहां प्रतिभागियों ने गहरी रुचि दिखाते हुए बाल संरक्षण, पॉक्सो अधिनियम, बच्चों के अधिकारों तथा उनसे संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। संवादात्मक वातावरण में आयोजित इस सत्र ने प्रतिभागियों को अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करने तथा विषय की व्यावहारिक एवं कानूनी समझ विकसित करने का अवसर प्रदान किया। मुख्य वक्ता द्वारा दिए गए विस्तृत एवं सरल व्याख्यान के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने में सहायता मिली कि बच्चों के प्रति किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण अथवा लैंगिक अपराध की स्थिति में किस प्रकार संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाना चाहिए तथा कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत आवश्यक कदम क्या होते हैं। सत्र के दौरान बाल अधिकारों की सुरक्षा में परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों एवं प्रशासन की साझा जिम्मेदारी पर भी विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए इसकी सराहना की।