आईटीएम यूनविर्सिटी ग्वालियर में शबद कीर्तन के साथ सजी संगीत की खुशनुमा शाम
- दंदौतवंदन अनेक बार, डोलन ते राखो प्रभु...ः हजूरी रागी भाई राय सिंह
- ‘राम सिमर राम सिमर एहि तेरा काज है...‘
- ‘जी के जीवन राम गुसाईंआ, मोहि न बिसराहु मैं जन तेरा...‘
- ‘एक पिता एकस के हम बारिक, तू मेरा गुर है...‘
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ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के तुरारी कैंपस स्थित मल्टीपर्पस इनडोर एरिना में सजा मंच। जहां विख्यात हजूरी रागी भाई राय सिंह ( श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर) एवं साथी ने अपनी सुरीली आवाज में गुरुबानी-शबद कीर्तन की संगीतमयी प्रस्तुति से शाम को खुशनुमा बना दिया। मौका था, गुरु श्री तेग बहादुर साहिब जी की शहादत का 350वां जयंती वर्ष के अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी द्वारा तीन दिवसीय ‘भारतीय भक्ति काव्य परम्परा सर्ग-2‘ श्री गुरु नानक देव जी (गुरुबानी-शबद कीर्तन को समर्पित) ‘आईटीएम संगीत सम्मेलन (18वां) के द्वितीय दिवस का। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के फाउंडर चांसलर श्री रमाशंकर सिंह जी, चांसलर श्रीमती रुचि सिंह, प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश उपाध्याय एवं रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, डाॅ. मुकेश पांडे, डाॅ. मनीष जैसल, अवनीश त्रिपाठी, गुरुद्वारा दाताबन्दी छोड़ गुरुद्वारा से बाबा लख्खा सिंह जी जत्थे के साथ शामिल हुए। इसके अलावा गुरुद्वारा कमेटी फूलबाग, गुरुद्वारा दाताबन्दी छोड़ के पदाधिकारी, सिख संगत, सिख समुदाय के लोग और बड़ी संख्या में युवा और ग्वालियर शहर से आए संगीत रसिकों ने गुरुबानी-शबद कीर्तन का आनंद लिया। वहीं मंच संचालन डाॅ. गीतांजलि सुरंगे द्वारा किया गया।
गुरु ग्रंथ साहिब महाराज पालकी में सुशोभित होकर आए
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के तुरारी कैंपस में फुटबाॅल ग्राउंड के पास स्थित मल्टीपर्पस इनडोर एरिना में आयोजित तीन दिवसीय आईटीएम संगीत सम्मेलन की 18वीं कड़ी में द्वितीय दिवस सर्व प्रथम दाताबंदी छोड़ गुरुद्वारा किला ग्वालियर से दस बादशाहियों की जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पालकी में सुशोभित होकर कार्यक्रम स्थल पर पूरी गुरु मर्यादा के साथ पहुंचे और गुरु महाराज जी का प्रकाश हुआ। वहीं द्वितीय दिवस के संपूर्ण कार्यक्रम के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पालकी में सुशोभित होकर पूरी गुरु मर्यादा से दाताबंदी छोड़ गुरुद्वारा के लिए प्रस्थान किया।
दंदौतवंदन अनेक बार, डोलन ते राखो प्रभु...ः हजूरी रागी भाई राय सिंह
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के तुरारी कैंपस में फुटबाॅल ग्राउंड के पास स्थित मल्टीपर्पस इनडोर एरिना में आयोजित तीन दिवसीय आईटीएम संगीत सम्मेलन की 18वीं कड़ी में द्वितीय दिवस शबद कीर्तन और संगीत की प्रस्तुति से पहले श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी भाई श्री राय सिंह जी ने युवाओं और छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिस स्थान पर शिक्षा मिले, जिस स्थान पर शिक्षा प्रदान की जाती है उस स्थान को मां समझना चाहिए। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर भी एक मां के समान है, जो हजारों बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, संस्कार और भारतीय भक्ति काव्य परम्परा की सीख प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि एक दंडवत शरीर से लंबे होकर लेटकर प्रणाम करना होता है और एक दंडवत योग आसन में होता है। उन्होंने कहा कि हम शरीर से तो दंडवत करते हैं, लेकिन मन से नहीं करते। उन्होंने कहा कि जब हम अंतरमन से प्रभु को दंडवत करते हैं तो प्रभु की कृपा अपने आप बरसती है।
उन्होंने ‘दंदौतवंदन अनेक बार, डोलन ते राखो प्रभु, नानक दे कर...‘ व्यक्त की।
‘राम सिमर राम सिमर एहि तेरा काज है...‘
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के तुरारी कैंपस में फुटबाॅल ग्राउंड के पास स्थित मल्टीपर्पस इनडोर एरिना में आयोजित तीन दिवसीय आईटीएम संगीत सम्मेलन (18वां) के द्वितीय दिवस का आगाज श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी भाई श्री राय सिंह एवं साथी ने धन गुरु बहादुर जी की वाणी के अंदर शबद कीर्तन की शुरूआत की।
उन्होंने शबद की प्रस्तुति दी, जिसके बोले थेः-
‘राम सिमर राम सिमर एहि तेरा काज है। माया को संग त्यागु प्रभु जू की सरन लागु, जगत सुख मन मइया झूठो सब साज है।
नानक जन कहत बात इहु साची सुनहु राजे...।‘
की मधुर प्रस्तुति के साथ ही उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की वाणी तकरीवन हिंदी में ही है। उस परमात्मा की दी हुई इस वाणी रूपी कृपा का शुक्रिया।
‘जी के जीवन राम गुसाईंआ, मोहि न बिसराहु मैं जन तेरा...‘
इसके बाद हजूरी रागी भाई श्री राय सिंह एवं साथियों ने अरदास रूपी शबद की संगीतमयी प्रस्तुति दी। जिसके बोले थेः-
‘जी के जीवन राम गुसाईंआ, मोहि न बिसराहु मैं जन तेरा,
राम गुसाईंया जी के जीवन, मोहि न बिसराहु मैं जन तेरा।
मेरी संगति पूछ सोच दिन राती, मेरा करम कुटिलता जन्म की बाती,
राम गुसाईंया जी के जीवन, मोहि न बिसराहु मैं जन तेरा...।‘
इसके साथ ही उन्होंने कहा भक्त नामदेव की कहानी बताई।
इसके बाद उन्होंने
मोरे हृदय बसो गोपाल, रस-रस गुण गाओ ठाकुर के, हृदय बसो गोपाल।
नेत्र पावन भये दरस तेरे, मनोहर, परौं राज लाल।,
तुमको राखनहार फूल, सुन्दर सुखन बेन्त...।
प्रस्तुति दी।
‘एक पिता एकस के हम बारिक, तू मेरा गुर है...‘
इसके बाद हजूरी रागी भाई श्री राय सिंह एवं साथियों ने शबद की संगीतमयी प्रस्तुति दी। जिसके बोले थेः-
‘ एक पिता एकस के हम बारिक, तू मेरा गुर है।
सुनि मीत जियो हमारी बलि बलि जासी, हरि दरसनु देहु पिता।
कोई बोले राम राम, कोई खुदाए। कोई सेवै गुसाईया...।‘
इसके बाद उन्होंने
‘जैसे एक जननी के होत हैं अनेक सुत,
सबही में मोर प्यारो सुख भगवान को।
पालना सुभाय माये घर काज लागे जाय,
सुन सुत रुदन पै पियावे मन मोड़ को।‘
की संगीतमयी प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोतागणों को आत्मिक शबद कीर्तन की प्रस्तुति देकर आनंदित कर दिया।
इसके बाद उन्होंने
‘क्यों न हरि को नाम ले मूरख निलज्ज रे, जन्म जात है जन्म।
राम भक्ति आन छोड़ देत, मन को मोह भ्रम...‘
की प्रस्तुति के साथ ही संगीत सम्मेलन के अंत में आनंद साहिब जी का पाठ और अरदास की। इस दौरान हजूरी रागी भाई श्री राय सिंह एवं साथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।