अब बिचौलिये एजेंट पर भी रिश्वत पकड़ने वाली विंग नजर रखेगी
(अजय मिश्रा)
भोपाल / ग्वालियर। मध्यप्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकारी व कर्मचारी अब अपनी गर्दन बचाने के लिये विभिन्न विभागों में सक्रिय दलालों, एजेंटों व राजनैतिक रसूख रखने वाले नेताओं के पट्ठों के द्वारा लेनदेन कर रहे हैं। इस मामले में किसी भी फाईल पर वह पहले आपत्ति लगाकर अपने एजेंटों को संबंधित पार्टी पर भेजकर उगाही कराते है। यह सिस्टम मध्यप्रदेश में अब विभिन्न विभागों में फैल गया हैं। इसी कारण अब लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू भी अपने पैरामीटर बदलने की तैयारी में है। अब रिश्वत लेने वाले अधिकारी के साथ उसकी दलाली करने वाले एजेंट व फाईलें पास कराने वाले मीडिएटर भी आरोपी बनाये जायेंगे।
भोपाल सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव अब मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्ती से अमल करने की तैयारी में हैं। इसके लिये मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव अब अपने गृह विभाग के अधीन आने वाली तीन विंग लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू ) और स्पेशल ब्रांच को विशेष निर्देश दे सकते है, ताकि रिश्वत लेने वाले अधिकारी, इंजीनियर व कर्मचारियों को उनकी दलाली लेने व बीच में दलाली खाने वालों को भी दबोचा जा सकें। बताया जाता हैं कि इसी क्रम में एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यकाल में जीएसटी विभाग में रिश्वत के आरोपी के साथ एक कर सलाहकार वकील को भी आरोपी बनाकर जेल भेजा गया था, जबकि यह कर सलाहकार सरकारी सेवा में न होकर प्राइवेट व्यक्ति था। बताया जाता है कि इसी संदर्भ में निर्माण विभाग से संबंधित विभागों में बढ़ती दलाली, रिश्वतखोरी रूपया देकर पोस्टिंग कराने वाले, अधिकारी व इंजीनियरों पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू विभाग, पुलिस की स्पेशल ब्रांच निगाह रखे हैं।