बीएसएफ हीरक जयंती: साइरस रुस्तमजी एवं आर. के. चौधरी ने किया आरजेआईटी का भ्रमण

पद्म विभूषण स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी की महान विरासत को नमन

ग्वालियर। सीमा सुरक्षा बल  की हीरक जयंती (डायमंड जुबिली)के शुभ अवसर पर रुस्तमजी प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजेआईटी) एवं बीएसएफ अकादमी, टेकनपुर ने  पद्म विभूषण स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी के सुपुत्र साइरस रुस्तमजी तथा सेवा निवृत आईजी बीएसएफ  आर. के. चौधरी,एवं स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी के निकट परिजन, का विशेष स्मृति-भ्रमण पर हार्दिक स्वागत किया।
पद्म विभूषण स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी के सुपुत्र साइरस रुस्तमजी का यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि बीएसएफ अपनी 60 वर्षों की गौरवपूर्ण सेवा, अनुशासन और अदम्य साहस का उत्सव मना रहा है। पद्म विभूषण स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी, जिन्हें“बीएसएफ के जनक”के रूप में जाना जाता है, के नेतृत्व, साहस एवं संस्थान निर्माण के प्रतीक रहे हैं। उनकी दूरदर्शी सोच आज भी बीएसएफ एवं उसके प्रमुख तकनीकी संस्थान आरजेआईटी को निरंतर प्रेरित करती है।
अपने दौरे के दौरान साइरस रुस्तमजी एवं  आर. के. चौधरी ने आरजेआईटी के छात्रों, संकाय सदस्यों, पूर्व छात्रों तथा बीएसएफ अकादमी के अधिकारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने संस्थान की उन्नत प्रयोगशालाओं ड्रोन लैब, स्कोडा लैब एवं एलजी लैब का भी निरीक्षण किया तथा आरजेआईटी की तकनीकी उपलब्धियों एवं नवाचारात्मक शैक्षणिक वातावरण की सराहना की।
हीरक जयंती समारोह के अंतर्गत दोनों विशिष्ट अतिथियों नेआरजेआईटी परिसर तथा नीम पर्वत पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, विकास और बीएसएफ की सतत विरासत का संदेश दिया।
इस अवसर पर श्री साइरस रुस्तमजी ने कहा कि “आरजेआईटी मेरे पिता स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी की दूरदृष्टि का जीवंत प्रतीक है। यह देखकर अत्यंत गर्व होता है कि यह संस्थान भविष्य के ऐसे इंजीनियर तैयार कर रहा है जो राष्ट्र के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
  इस अवसर पर आर. के. चौधरी, सेवानिवृत्त आईजी बीएसएफ, ने कहा कि “बीएसएफ की मूल पहचान समर्पण और चरित्र में निहित है। आरजेआईटी ने इन मूल्यों को सदैव उच्च स्तर पर बनाए रखा है और यह सीएपीएफ द्वारा स्थापित सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थानों में निरंतर प्रगति कर रहा है।” इस अवसर पर एडीजी एवं अकादमी निदेशक डा शमशेर सिंह एवं अन्य अधिकारी भी  मौजूद रहे। 
आरजेआईटी और बीएसएफ अकादमी ने दोनों अतिथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया और स्व. श्री के. एफ. रुस्तमजी की महान विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा में उत्कृष्टता को बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

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