जेयू में खुला ‘संबद्धता माफिया’ का राज: नियमों की हत्या, ईमानदार कॉलेज की बलि – संजय दीक्षित ने फोड़ा बम!


*ग्वालियर, जीवाजी विश्वविद्यालय में कॉलेज संबद्धता को लेकर निरीक्षण समितियों की सिफारिशों को दरकिनार कर मनमाने फैसले लेने का मामला सामने आया है। सामने आए तथ्यों के अनुसार, निरीक्षण समिति ने आरएबी कॉलेज, ग्वालियर को संबद्धता देने की स्पष्ट अनुशंसा की थी, लेकिन स्थायी समिति ने उसे अमान्य घोषित कर दिया। वहीं उमा डिग्री कॉलेज में कर्मचारियों को नगद वेतन जैसी गंभीर अनियमितता दर्ज होने के बावजूद उसे संबद्धता दे दी गई।

मध्य प्रदेश आरटीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष *एडवोकेट संजय दीक्षित* ने इस दोहरे रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा:  
“निरीक्षण समिति की सकारात्मक रिपोर्ट होने के बावजूद आरएबी कॉलेज को अमान्य करना और गंभीर अनियमितता वाले कॉलेज को राहत देना – यह सीधे-सीधे विश्वविद्यालय की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल है। इससे साफ है कि संबद्धता का फैसला नियमों से नहीं, बल्कि अंदरूनी सेटिंग से हो रहा है।”

संजय दीक्षित ने मांग की कि:
1. जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थायी समिति द्वारा संबद्धता के लिए गए सभी फैसलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
2. निरीक्षण रिपोर्ट को नजरअंदाज करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो।
3. आरएबी कॉलेज के साथ हुए भेदभाव की समीक्षा कर, यदि निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक है तो उसे तत्काल संबद्धता दी जाए।

“शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का पक्षपात विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ है। आरटीआई फाउंडेशन इस मामले को राज्यपाल और उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष उठाएगा,” संजय दीक्षित ने कहा।

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*जारीकर्ता:* एडवोकेट संजय दीक्षित, अध्यक्ष – मध्य प्रदेश आरटीआई फाउंडेशन, ग्वालियर

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