शिवपुरी। अखंड ब्राह्मण सेवा समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक पंडित सुभाष कुमार चतुर्वेदी के निर्देशानुसार, प्रदेश अध्यक्ष पंडित रविराजन मिश्रा के आवाहन पर 1990 में मंडल आयोग के विरोध में आत्मदाह करने वाले सवर्ण युवाओं की याद में चलाए जा रहे श्रद्धांजलि पखवाड़ा अभियान के तहत जिन जिलों में जहां अभी तक श्रद्धांजलि सभा आयोजित नहीं की गई वहां 18 अप्रैल तक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन अवश्य करें। इस कार्यक्रम के माध्यम से सवर्णों को जातिगत आरक्षण के विरोध में जागृत किया जा रहा है।
कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि अखंड ब्राह्मण सेवा समिति भारतवर्ष के सभी सदस्य सूचना मिलने पर एक जगह एकत्रित होकर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करें। जो कौम अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करती, उसे स्वतंत्र रहने का अधिकार नहीं। कर्तव्य निभाकर ही अधिकार प्राप्त किया जा सकता है। राजनीतिक गुलामी की जड़े हमारे दिमाग को जकड़े हैं। आज भी जिनके हमें गले पकड़ना था, हमने उन नेताओं के पांव पकड़ रखे हैं। हम समानता, समरसता, एकता, भाईचारा और सौहार्द की बात करते हैं, लेकिन सरकार इंसान को इंसान से लड़ा रही है। कभी एससी/एसटी एक्ट, कभी आरक्षण, कभी यूजीसी, कभी हिंदू- मुसलमान, कभी अंगड़े- पिछड़े, कभी जातियों में लड़वाना राजनीतिज्ञो का काम रह गया है। यदि आप एकाग्र होकर सीधे हाथ से कार्य करेंगे तो विजय आपके बाएं हाथ में होगी।भारत का इतिहास लिखा जाएगा तब बताया जाएगा कि हमारे बाप दादा 5 किलो अनाज के लिए तड़पते थे। भूखे मरते थे। सरकार 80 करोड़ जनता को राशन खिलाती थी। महिलाओं पर कपड़े नहीं थे। सरकार लाड़ली बहना चलाकर रुपए देती थी। आज राजनीतिज्ञ कर्म से दूर, हराम का वोट पाने के लिए, हमारे टैक्स का पैसा लुटाकर जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। यह भारत का दुर्भाग्य है।
कई देश हमारे बाद स्वतंत्र हुए, आज वे विकसित हैं, क्योंकि वे कर्मठ है। वे जात पात, रंगभेद से दूर कर्म में विश्वास करते हैं। अगर हम अपने देश को विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं तो संगठित होकर हर क्षेत्र में मेहनत करनी होगी। क्रिया सिद्धी हमारे पौरुष से होती है, उपकरणों से नहीं। एकाग्रता और आत्मबल हमें लक्ष्य की ओर ले जाता है। कैप्टन चन्द्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि अखंड ब्राह्मण सेवा समिति देश को प्रथम रखकर, कर्म सील होकर, विकसित भारत बनाना चाहती है। अतः हम सब स्वार्थ, अहंकार, लापरवाही से ऊपर उठे, समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करें। लड़ाई झगड़ों में अपना समय बर्बाद ना करें। ज्ञान और योग्यता को वरीयता दें। तभी एक भारत, श्रेष्ठ भारत, सामर्थ्यवान भारत का सपना साकार होगा।