LNIPE ग्वालियर में 24-25 अक्टूबर को आयोजित होगा तृतीय योग शास्त्र संगम 2026 राष्ट्रीय सम्मेलन
‘पातंजल योगदर्शन’ विषय पर होगा शास्त्रीय विमर्श, शोध-पत्र प्रस्तुति, योगासन एवं योगसूत्र उच्चारण प्रतियोगिताएं होंगी प्रमुख आकर्षण
ग्वालियर। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE), ग्वालियर एवं विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, प्रकल्प नीड़म के संयुक्त तत्वावधान में 24 एवं 25 अक्टूबर 2026 को तृतीय योग शास्त्र संगम 2026 राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘पातंजल योगदर्शन’ है। विक्रांत विश्वविद्यालय, ग्वालियर के विशेष सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन योग के शास्त्रीय, दार्शनिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर सार्थक संवाद और विचार-विमर्श का राष्ट्रीय मंच बनेगा।
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता LNIPE की कुलपति प्रोफेसर कल्पना शर्मा करेंगी। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। विक्रांत विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. आर. एस. राठौर विशिष्ट अतिथि होंगे, जबकि अखिल भारतीय विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी के योग प्रमुख श्री रवि शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित योगदर्शन भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। सम्मेलन में चित्त, वृत्तियों, अभ्यास-वैराग्य, यम-नियम, अष्टांग योग, ध्यान, समाधि एवं कैवल्य जैसी अवधारणाओं के शास्त्रीय अध्ययन के साथ वर्तमान जीवन में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं योग-साधकों के बीच ज्ञान-विनिमय और शोध को प्रोत्साहित करना है।
सम्मेलन के अंतर्गत शोध-पत्र प्रस्तुति, पोस्टर प्रस्तुति, पातंजल योगसूत्र उच्चारण प्रतियोगिता, योगासन प्रतियोगिता, समूह चर्चा तथा योग विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागियों को योगदर्शन के विभिन्न आयामों पर अपने शोध एवं विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन के लिए शोध-पत्र भेजने की अंतिम तिथि 23 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। सम्मेलन का आयोजन LNIPE ग्वालियर के रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में किया जाएगा।
यह सम्मेलन भारतीय योग परंपरा के शास्त्रीय ज्ञान को समकालीन संदर्भों से जोड़ने तथा योग के वैज्ञानिक, दार्शनिक एवं व्यावहारिक पक्षों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।