ग्वालियर। ग्वालियर व्यापार मेला परिसर में आयोजित स्वदेशी मेला-दीपोत्सव 2026 में गुरुवार को ऐसा नजारा दिखा, मानो पूरा भारत एक ही छत के नीचे सिमट आया हो। महाराष्ट्र की नऊवारी साड़ी, गुजरात का घाघरा-चोली, बंगाल की लाल-सफेद साड़ी और राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा में सजी प्रतिभागियों ने देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक गतिविधियों के तहत आयोजित पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता में स्कूल-कॉलेज की छात्राओं से लेकर महिलाओं तक ने 28 राज्यों के पारंपरिक परिधानों में भाग लिया। प्रतिभागियों की वेशभूषा और प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
22 अक्टूबर को आयोजित प्रतियोगिता तीन चरणों में हुई। पहले चरण में प्रतिभागियों ने रैंप वॉक किया। दूसरे चरण में अपने राज्य और स्वयं का परिचय दिया, जबकि तीसरा चरण प्रश्न-उत्तर पर आधारित रहा। निर्णायक के रूप में पार्वती विद्यापीठ की प्राचार्य अर्चना शर्मा, पीजीवी कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. वंदना सेन और माधव विधि महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. शीतल जैन उपस्थित रहीं। इसके पूर्व दिवस भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय नशा मुक्त भारत था। इसमें 20 से अधिक वक्ताओं ने अपने विचारों और तर्कों के माध्यम से समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश दिया। निर्णायक के रूप में पीजीवी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील पाठक, माधव महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार शर्मा और माधव शिक्षा महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक बसंती संत मौजूद रहीं। महिला विभाग संयोजक रोली श्रीवास्तव ने सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन किया। इस अवसर पर डॉ. भारती माहेश्वरी, निरुपमा मालपानी, साधना सैंडल, रिया सक्सेना, आकांक्षा मिश्रा और पवन यादव सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।