गंगादास जी की बड़ी शाला में गूंजा शौर्य का उद्घोष शस्त्र पूजन के बाद दहाड़ी ऐतिहासिक तोप
745 बलिदानी संतों के शौर्य का स्मरण, प्राचीन तोप का पूजन कर किया गया संचालन
ग्वालियर। शौर्य, साधना और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली परंपरा का साक्षी सिद्धपीठ श्रीगंगादास जी की बड़ी शाला मंगलवार को विजयादशमी के पावन पर्व पर धर्म और वीरता के रंग में रंग उठी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शस्त्रों और निर्मोही, निर्वाणी एवं दिगंबर अखाड़ों के निशानों का विधि-विधान से पूजन किया गया। इस अवसर पर शाला में सुरक्षित प्राचीन तोप का भी पूजन कर उसे चलाया गया। आयोजन में वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महारानी लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए बलिदान देने वाले 745 संतों के शौर्य और त्याग का भावपूर्ण स्मरण किया गया।
लक्ष्मीबाई कॉलोनी, पड़ाव स्थित लगभग 700 वर्ष प्राचीन इस सिद्धपीठ में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन और अखाड़ों के निशानों की पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में शक्ति, धर्मरक्षा और राष्ट्र के प्रति समर्पण के महत्त्व को रेखांकित करती है। शाला में सुरक्षित प्राचीन तोप भी इस ऐतिहासिक विरासत का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है। मान्यता है कि अंग्रेज सेना को रोकने के लिए इस तोप का उपयोग किया गया था, जिससे महारानी लक्ष्मीबाई के अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए समय मिल सका।
महंत एवं पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवकदास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित समारोह में अंचल के साधु-संतों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर 1857 के संग्राम में बलिदान देने वाले संतों के शस्त्रों
- बरछी, कृपाण, कटारी, तलवार और चिमटे सहित अन्य पारंपरिक अस्त्रों का पूजन किया गया। स्वामी रामसेवकदास जी महाराज ने निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर अखाड़ों के निशानों का पूजन कर अखाड़ा परंपरा के प्रति श्रद्धा निवेदित की।
आचार्य मनीष दुबे और प्रदीप गोस्वामी ने विधि-विधान के साथ पूजन संपन्न कराया। पूरे आयोजन में धर्म, अध्यात्म और शौर्य की त्रिवेणी का भाव मुखर रहा। विजयादशमी के इस पर्व ने उपस्थित जनों को भारतीय परंपरा में शस्त्र और शास्त्र के समन्वय तथा धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पित करने वाले वीरों के बलिदान का स्मरण कराया।
इस अवसर पर स्वामी रामसेवकदास जी महाराज ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति और कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी और पत्रकार डॉ केशव पांडे संत सेवादास जी, श्रीदास जी, रामदास जी, नरसिंहदास जी, उत्तमदास जी, गोपालदास जी, कन्हैयादास जी, अवधेशशरण जी, रामकिशनदास जी, अनिल शर्मा, शैलेश तिवारी और रेवतीरमन कटारे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
शाला में आयोजित विजयादशमी समारोह के अंत में दो दिन पूर्व शीतला माता मंदिर के समीप हुए भीषण हादसे में काल-कवलित श्रद्धालुओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।