- ट्रैफिक सिस्टम सुधारने में रुचि नहीं ले रहे अफसर
(संजय तोमर)
ग्वालियर| घटिया निर्माण के चलते सड़कों की बदहाली, अपराधों में हो रहा इजाफा और हर तरफ गंदगी के ढेर वाली कथित स्मार्ट सिटी में अब देखने के लिए कुछ नहीं बचा है। आलम ये है कि शाम को इस सिटी में हर तरफ सड़कों पर जाम के नजारे दिखते हैं। जिस रास्ते पर भी गुजरो बस वाहनों की लंबी कतारें इंतजार करती हैं धुआं, धूल के गुबारों के बीच। विकास का कथित ढोल पीटने वाले राजनेता अब दिखाई नहीं देते। बस उनके सायरन बजाते वाहन सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते दिखाई देते हैं।
आलम ये है कि जिस एलीवेटेड रोड को विकास का प्रतीक बताया जा रहा है उसने शहर के विकास को सर्वाधिक बदसूरत कर दिया है। इस रोड को शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले फूलबाग से होकर निकाला जा रहा है। इससे न तो वर्षों पुराने इस चौराहे की खूबसूरती बची है न ही प्राकृतिक वातावरण का सुकून मिल पा रहा है। एलीवेटेड रोड कब बनकर तैयार होगी और कैसे यहां पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा भविष्य ही बताएगा।
शहर के दूसरा स्थल रेलवे स्टेशन भी धीरे-धीरे व्यस्ततम ही नहीं हो रहा जाम से बेहाल है। यहां सुबह का वक्त छोड़ दया जाए तो दोपहर से शाम और रात तक यहां पर हालात इतने ज्यादा खराब रहते हैं कि लोग इस रास्ते पर जाने से घबराते हैं।रेलवे स्टेशन का आकार इस कदर बढ़ रहा है कि अब तो लोगों को यह तक अंदाज लगाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर स्टेशन का विस्तार कब थमेगा। आखिर इतने विशाल स्टेशन परिसर को बनाने का उद्देश्य क्या है। आमजन शंका करने लगे हैं कि अब स्टेशन के अंदर घुस पाना भी दूभर होगा। निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन के आसपास इस कदर अंधकार रहता है कि यात्री को समझ में नहीं आता कि आखिर प्रवेश द्वार कहां है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। हर चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल तो लगाए गए हैं किंतु वे वीआईपी लोगों को लिए नहीं हैं। अक्सर वीआईपी वाहन इन चौराहों पर सिग्नल तोड़ते हुए आगे बढ़ जाते हैं। वहीं सामान्य वाहन चालकों को शिकंजे में लेकर चालानी कार्रवाई की जा रही है। अब तो ये आलम है कि ज्यादा वाहन चालकों पर हेलमेट का प्रयोग न करने पर चालान काटे जा रहे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था के नाम शहर की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। मुख्य बाजारों में रेडलाइट सिग्नल का पालन नहीं होता है।