आईटीएम ग्वालियर में हुआ ‘टेडएक्स (TEDx)टॉक-2026‘ का आयोजन


- संघर्ष, कमियां और सवाल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैंः मनीष पुष्कले

- नेतृत्व का संबंध जेंडर से नहीं, क्षमता और निर्णय लेने की दक्षता से हैः सर्वप्रिया सांगवान

- वुमेन आजादी से जीना शुरू करें, क्योंकि आजादी अपने आप में सफलता हैः अभिनेत्री टी.जे. भानु

- एआई के दौर में सबसे मूल्यवान संसाधन हमारा ध्यान और सोचने की क्षमता हैः रिशु शर्मा

- छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल, अतिथि वक्ताओं ने जवाब देकर किया मोटिवेट
ग्वालियर । आईटीएम ग्वालियर में टेडेक्स l (TEDx) टॉक-2026 का आयोजन किया गया। आईटीएम सिथौली परिसर स्थित राम मनोहर लोहिया सभागार में आयोजित टेडेक्स l (TEDx) टॉक-2026 में स्पीकर (वक्ता) के रूप में मनीष पुष्कले (अग्रणी समकालीन कलाकार, एस.एच. रजा के शिष्य और प्रशिक्षित भूविज्ञानी), रिशु शर्मा (सीनियर डायरेक्टर, काउंसिलिंग एंड स्ट्रेटेजी, बिरला सॉफ्ट एजेंटिंक एआई एडवाइजर), सर्वप्रिया सांगवान (बीबीसी जर्नलिस्ट) और टी.जे. भानु (भारतीय अभिनेत्री और निर्माता)  शामिल हुईं। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह, प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार डॉ. ओमवीर सिंह, आईटीएम ग्वालियर की डायरेक्टर डॉ. मीनाक्षी मजूमदार, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव,  आईटीएम ग्वालियर सिथौली परिसर के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्याम बाबू सिंह जो कि टेएड ¼Technology, Entertainment, Design½ के ऑफिसियल लाइसेंसी हैं, सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, डीन प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन कशिश तोमर द्वारा किया गया। 
संघर्ष, कमियां और सवाल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैंः मनीष पुष्कले
आईटीएम ग्वालियर में आयोजित टेडेक्स (TEDx) टॉक-2026 के अवसर पर स्पीकर (वक्ता) मनीष पुष्कले (अग्रणी समकालीन कलाकार, एस.एच. रजा के शिष्य और प्रशिक्षित भूविज्ञानी) द्वारा ^Detour that is my Destiny' डेटोर देट इज माई डेस्टिनी‘ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष, कमियां और सवाल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। व्यवस्था हमें सवालों के उत्तर तलाशना सिखाती है, जबकि कला हमें सवालों के साथ बने रहना सिखाती है। उत्तर समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन सवाल शाश्वत होते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में जब हमारा रास्ता बदलता है, उसी समय खुद को दोबारा दिशा देने का अवसर भी मिलता है। यही ‘री-रूटिंग’ कई बार जीवन में गेम चेंजर बन जाती है। उन्होंने बताया कि भोपाल के सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे होने के बावजूद पढ़ाई में मेरी रुचि नहीं थी। परिवार में सभी की सफलता के बीच मैं स्वयं को अलग महसूस करता था। कला मेरे जीवन में स्वाभाविक रूप से आई। भारत भवन की यात्रा ने मुझे कला की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। बाद में 1995 में रेस्टोरेशन और कंजर्वेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली गया। वहां शुरुआती संघर्षों के बावजूद अपनी राह बनाई। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां ही कई बार हमारी सबसे बड़ी शिक्षक बनती हैं और संघर्षों के बीच विकसित अनुशासन जीवन को नई दिशा देता है।
नेतृत्व का संबंध जेंडर से नहीं, क्षमता और निर्णय लेने की दक्षता से हैः सर्वप्रिया सांगवान
आईटीएम ग्वालियर में आयोजित टेडेक्स (TEDx) टॉक-2026 में स्पीकर (वक्ता) सर्वप्रिया सांगवान (बीबीसी जर्नलिस्ट) ने ^Leading as her: decoding power in india'‘लीडिंग एज हरः डिकोडिंग पॉवर इन इंडिया‘ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व को अक्सर पुरुषों से जोड़कर देखने की आदत समाज में आज भी बनी हुई है, जबकि नेतृत्व का संबंध जेंडर से नहीं, बल्कि व्यक्ति की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और अपने विचारों को साबित करने की प्रतिबद्धता से है। उन्होंने अपनी बात एक पहेली से शुरू की, जिसमें दुर्घटना में पिता की मृत्यु के बाद घायल बेटे को अस्पताल ले जाया जाता है और सर्जन उसे देखकर कहता है-‘मैं आपका पिता हूं। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण हमारे भीतर मौजूद लैंगिक पूर्वाग्रह को बहुत गहराई से समझने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन केवल उसकी उम्र, अनुभव या दिखावे के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए कहा कि अनुभव जरूरी है, लेकिन ’एक्सपीरियंस का मतलब एक्सपर्टीज नहीं होता। उन्होंने कहा कि बीबीसी में भर्ती के दौरान भी निर्णय लेने की क्षमता, काम की गुणवत्ता और प्रदर्शन को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नेतृत्व के शीर्ष पदों पर पहुंचती हैं तो लोगों को आश्चर्य होता है, जबकि इसे सामान्य रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व को समाज जितनी जल्दी सहजता से स्वीकार करेगा, उतनी ही तेजी से समानता की दिशा में बदलाव आएगा। उन्होंने युवाओं से किताबों के साथ व्यावहारिक अनुभव को भी महत्व देने की अपील की।
वुमेन आजादी से जीना शुरू करें, क्योंकि आजादी अपने आप में सफलता हैः अभिनेत्री टी.जे. भानु
आईटीएम ग्वालियर में आयोजित टेडेक्स (TEDx) टॉक-2026 में स्पीकर (वक्ता) टी.जे. भानु (भारतीय अभिनेत्री और निर्माता) ने Aazadi for Women (महिलाओं के लिए आजादी) विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में लिए गए हर फैसले का सही होना जरूरी नहीं है। संभव है कि दस में से सात फैसले गलत हों और कभी-कभी दस में से दस फैसले सही भी हो सकते हैं। इसलिए गलतियों के डर से निर्णय लेना बंद नहीं करना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि मैंने 16 वर्ष की उम्र में छोटे से केबल न्यूज चैनल पर न्यूज रीडर के रूप में काम शुरू किया। मासकम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान मुझे महसूस हुआ कि नौकरी जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकती। इसके बाद मैंने अपनी पसंद और रचनात्मकता को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हिस्से की आजादी और अपने लिए जीने की बात समाज में अभी भी कम होती है। अपनी तरह से दुनिया देखने के लिए घर से बाहर निकलना जरूरी है, हालांकि इसमें चुनौतियां और खतरे भी होते हैं। उन्होंने कहा कि बंधे रहने से जीवन ठहर जाता है। उन्होंने कहा कि आजादी से जब आप जीने लगते हैं तो सफलता की गारंटी नहीं होती, लेकिन आजादी अपने आप में सफलता है। उन्होंने महिलाओं से ‘गुड गर्ल सिंड्रोम’ और डर से बाहर निकलकर अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो मन करता है, उसे जरूर करें और हर कदम पर जीत-हार की शर्त न रखें। उन्होंने कहा कि हमें अपने स्वयं के लिए जीने की ज्यादा जरूरत है।
एआई के दौर में सबसे मूल्यवान संसाधन हमारा ध्यान और सोचने की क्षमता हैः रिशु शर्मा
आईटीएम ग्वालियर में आयोजित टेडेक्स (TEDx) टॉक-2026 में स्पीकर (वक्ता) रिशु शर्मा (सीनियर डायरेक्टर, काउंसिलिंग एंड स्ट्रेटेजी, बिरला सॉफ्ट एजेंटिंक एआई एडवाइजर) ने ^The new rich are people who can still think' ‘द न्यू रिच आर हू केन स्टिल थिंक‘ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि एआई के दौर में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि हमारे पास कितना समय बच रहा है, बल्कि यह है कि उस समय का हम क्या करते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक हमें समय और सूचनाएं उपलब्ध करा सकती हैं, लेकिन उनका सार्थक उपयोग करने के लिए मानवीय सोच और निर्णय क्षमता जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज लोग समय बचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बचा हुआ समय किस तरह उपयोग करना है, यह स्वयं एक बड़ी चुनौती बन गया है। गहन चिंतन कभी कठिन कार्य माना जाता था, लेकिन अब मोबाइल एप्लीकेशन तक दूसरे एप्स को ब्लॉक करने की सुविधा दे रहे हैं। इसका कारण यह है कि हमारी संज्ञानात्मक क्षमता और ध्यान लगातार सीमित होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई के कारण कार्यों का निष्पादन तेजी से सस्ता और आसान हो रहा है। ऐसे में भविष्य में महत्व केवल इस बात का नहीं होगा कि कोई काम कितनी तेजी से किया जा सकता है, बल्कि इस बात का होगा कि क्या करना है, क्यों करना है और सही प्रश्न कौन से पूछे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई इंसानों को अधिक समय और क्षमता देगा, लेकिन उस समय और क्षमता का उपयोग किस दिशा में करना है, इसका निर्णय मनुष्य को ही करना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में वास्तविक ‘अमीर’ वे लोग नहीं होंगे जिनके पास सबसे अधिक संसाधन होंगे, बल्कि वे होंगे जो तय कर सकेंगे कि उनका ध्यान और समय वास्तव में किस चीज के योग्य है।
छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल, अतिथि वक्ताओं ने जवाब देकर किया मोटिवेट
आईटीएम ग्वालियर में आयोजित टेडेक्स (TEDx) टॉक-2026 के अवसर पर सवाल-जवाब सत्र का आयोजन भी किया गया। जहां छात्रा अपराजिता (एमबीए), छात्रा मेघना शर्मा (एमबीए थर्ड ईयर), छात्र आशुतोष कुमार (बीटेक सेकेंड ईयर), छात्र आदित्य जैन (एमबीए सेकेंड ईयर) सहित अन्य छात्र-छात्राओं ने अतिथि वक्ताओं से संबंधित विषयों पर सवाल पूछे। जिनके जवाब देकर वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं को मोटिवेट किया। वहीं कार्यक्रम में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह, प्रो-चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय, एवं रजिस्ट्रार डॉ. ओमवीर ंिसंह द्वारा अतिथि वक्ताओं ने स्मृति चिन्ह भेंट किए।  
 

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