आईटीएम यूनिवर्सिटी में वास्तु-प्रेरित सस्टेनेबल इंटीरियरः परंपरा, प्रकृति और डिजाइन का तालमेल‘ विषय पर एक्सपर्ट टाॅक का हुआ आयोजन
- वास्तु सिर्फ पारंपरिक गाइडलाइंस का सेट नहीं है, बल्कि एक समग्र डिजाइन फिलाॅसफी हैः एक्सपर्ट डाॅ. किरण बाजपेयी
- छात्र-छात्राओं ने सीखा घरों और कमर्शियल स्थानों के इंटीरियर में वास्तु सिद्धांतों का व्यावहारिक इस्तेलाम करना
- छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल, एक्सपर्ट ने दिए जवाब
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ अट्र्स एंड डिजाइन के अंतर्गत इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट द्वारा ‘वास्तु-प्रेरित सस्टेनेबल इंटीरियरः परंपरा, प्रकृति और डिजाइन का तालमेल‘ विषय पर एक्सपर्ट टाॅक का आयोजन किया गया। जहां एक्सपर्ट के रूप में विख्यात वास्तु कंसल्टेंट और सस्टेनेबिलिटी की पैरोकार डाॅ. किरण बाजपेयी शामिल हुईं। इस अवसर पर स्कूल आफ आट्र्स एंड डिजाइन द्वारा संचालित सस्टेनेबल क्लब की कोर्डीनेटर अश्विनी शर्मा, इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट कोआॅर्डिनेटर आकांक्षा तोमर, क्लब से जुड़े छात्र रोहित चतुर्वेदी, असिस्टेंट प्रोफेसर फरान कुर्रेशी, स्वीटी शर्मा सहित विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
वास्तु सिर्फ पारंपरिक गाइडलाइंस का सेट नहीं है, बल्कि एक समग्र डिजाइन फिलाॅसफी हैः एक्सपर्ट डाॅ. किरण बाजपेयी
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ आट्र्स एंड डिजाइन के अंतर्गत इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित एक्सपर्ट टाॅक में शामिल हुईं एक्सपर्ट डाॅ. किरण बाजपेयी ने बताया कि वास्तु सिर्फ पारंपरिक गाइडलाइंस का सेट नहीं है, बल्कि एक समग्र डिजाइन फिलाॅसफी है, जो प्राकृतिक रोशनी, क्राॅस-वेंटिलेशन, थर्मल आराम, ऊर्जा की बचत और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल इंटीरियर को मौसम के अनुकूल प्लानिंग, इको-फ्रेंडली मटेरियल के इस्तेमाल, पानी बचाने की रणनीतियों और जगहों की सही दिशा और व्यवस्था से बहुत फ़ायदा हो सकता है।
छात्र-छात्राओं ने सीखा घरों और कमर्शियल स्थानों के इंटीरियर में वास्तु सिद्धांतों का व्यावहारिक इस्तेमाल करना
स्कूल आफ आट्र्स एंड डिजाइन के अंतर्गत इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित एक्सपर्ट टाॅक के अवसर पर इंटरेक्टिव सेशन का आयोजन भी किया गया। जहां छात्र-छात्राओं ने घरों और कमर्शियल स्थानों के इंटीरियर में वास्तु सिद्धांतों के व्यावहारिक इस्तेमाल के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्र-छात्राओं को केस स्टडीज से पता चला कि कैसे बांस, फिर से इस्तेमाल की गई लकड़ी, प्राकृतिक पत्थर, टेराकोटा और कम-वीओसी फिनिश जैसे सस्टेनेबल मटीरियल को वास्तु-आधारित प्लानिंग के साथ प्रभावी ढंग से मिलाकर सेहतमंद और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार इंटीरियर माहौल बनाया जा सकता है।
छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल, एक्सपर्ट ने दिए जवाब
स्कूल आफ आट्र्स एंड डिजाइन के अंतर्गत इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित एक्सपर्ट टाॅक में इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट के छात्र-छात्राओं और फैकल्टी मेंबर्स एकसाथ आए ताकि पारंपरिक भारतीय वास्तु सिद्धांतों और आधुनिक सस्टेनेबल इंटीरियर डिजाइन के तरीकों को एकसाथ लाने के बारे में जान सकें। इस अवसर पर सवाल-जवाब का एक जीवंत सेशन का आयोजन भी किया गया। जहां छात्र-छात्राओं ने असल जिंदगी की डिजाइन चुनौतियों, शहरी घरों की सीमाओं और सस्टेनेबल इंटीरियर समाधानों में टेक्नोलाजी की भूमिका पर सवाल किए। जिनका जवाब देते हुए एक्सपर्ट डाॅ. किरण बाजपेयी ने बहुत ही सरल अंदाज में जवाब दिए। उन्होंने उभरते हुए डिजाइनरों को पारंपरिक ज्ञान और इनोवेशन व सबूत आधारित डिजाइन के तरीकों के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। एक्सपर्ट टाॅक के अवसर पर छात्र-छात्राओं को सस्टेनेबिलिटी और वास्तु को एक-दूसरे के पूरक नजरिए के तौर पर देखने के लिए प्रेरित किया, जो काम के अनुकूल, सांस्कृतिक रूप से जुड़े और पर्यावरण के प्रति जागरूक इंटीरियर स्पेस बनाने में योगदान दे सकते हैं।
वहीं समापन अवसर पर सस्टेनेबल क्लब से जुड़े छात्र रोहित चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। वहीं क्लब की कोआॅर्डिनेटर अश्विनी शर्मा और इंटीरियर डिजाइन डिपार्टमेंट कोआॅर्डिनेटर आकांक्षा तोमर ने एटसपर्ट डाॅ. किरण बाजपेयी को स्मृति-चिन्ह भेंट किया।