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पानी बचाना हमारी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। पानी बचाना बेहद जरूरी है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के इस अनमोल वरदान से कभी भी कमी महसूस नहीं करें। इसके लिए हमें अपने वर्तमान जल स्रोतों के साथ सूख चुके जल स्रोतों को संरक्षित करना ही होगा। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और समाज के साझा प्रयासों से हो रहे इस अभियान में बीते एक माह में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है।

प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने अल्प समय में ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विगत 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ यह अभियान जल संरक्षण, जल संरचनाओं के संवर्धन और जनभागीदारी का एक व्यापक जन-आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के प्रभाव से ही मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग सुधारकर अब तीसरे स्थान पर आ गया है। अभियान से पहले मध्यप्रदेश नेशनल रैंकिंग में छठवें स्थान पर था।राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियां नियत की गई हैं। इसके लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान में कुल 2 लाख 44 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों को चिन्हित कर लगभग 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

अभियान की मॉनिटरिंग एकीकृत डैश बोर्ड से
आयुक्त, मनरेगा ने बताया कि अभियान की एक ही प्लेटफार्म पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक एकीकृत डैश बोर्ड तैयार किया गया है, जिससे सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों की प्रगति दर्ज कर रहे हैं। इस डैश बोर्ड से जिलेवार रैंकिंग भी सुनिश्चित की जा रही है। इस डैश बोर्ड से प्रशासनिक एवं विभागीय पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान अंतर्गत 39 हज़ार 977 खेत तालाबों का निर्माण, 59 हज़ार 577 कूप-रीचार्ज संरचनाओं तथा 21 हज़ार 950 से अधिक पहले से निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित भी किया गया है। इसके साथ ही अमृत सरोवरों के निर्माण और उनके उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण
नगरीय क्षेत्रों में भी जल संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तालाब, कुएं और पुरानी बावड़ियों के संवर्धन, नालों की सफाई और सौंदर्यीकरण तथा रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त तेज़ गर्मी को देखते हुए नगरीय निकायों द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्याऊ की स्थापना भी की गई है।

म.प्र. जन अभियान परिषद चला रही जनजागरूकता गतिविधियाँ
म.प्र. जन अभियान परिषद के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 5 लाख 25 हजार से अधिक व्यक्तियों की सक्रिय सहभागिता दर्ज की गई। साथ ही प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों में 2 हज़ार 682 जल मंदिर (प्याऊ) स्थापित किए गए हैं।

स्कूलों में जागरूकता गतिविधियां
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी इस अभियान में व्यापक तौर पर भागीदारी की जा रही है। राज्य के हजारों विद्यालयों में जल रैलियां, निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है। तकनीकी नवाचार अंतर्गत वॉटरशेड विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन स्वीकृति और मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है।
वन और पर्यावरण विभाग द्वारा भी जल संरक्षण के साथ पारिस्थितिकीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फील्ड गतिविधियां की जा रही हैं। नदियों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण, जल संरचनाओं का निर्माण तथा पौधरोपण की तैयारी जैसे कार्य इसमें शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग और नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। इससे धरातल पर मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करने में भी मदद मिल रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम मिलने शुरू हो गए है। मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल देश के दूसरे राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनती जा रही है।

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