अब महिला प्रताड़ना एवं पोक्सो के झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों की खैर नहीं

धौलपुर (प्रदीप कुमार वर्मा)। अपने विरोधियों के विरुद्व बदला लेने की खातिर महिला प्रताड़ना एवं पोक्सो के झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों से पुलिस सख्ती से निपटेगी। पुलिस की जांच में ऐसा मामला झूठा पाए जाने पर पुलिस ऐसे फरियादियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि जिले में झूठे मुकदमे दर्ज करवाने वालों के खिलाफ धौलपुर पुलिस द्वारा अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जिले में अब महिला अत्याचार व पोक्सो के प्रकरण केवल एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर फाइल बंद नहीं होगी, बल्कि झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों को कोर्ट से सजा दिलाने तक पुलिस पीछा करेगी। पुलिस अधीक्षक सांगवान ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा निष्पक्ष अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक के माध्यम से वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जिले भर में 01 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक जिले में महिला अत्याचार के दर्ज हुए कुल 249 प्रकरणों में से 86 प्रकरण अनुसंधान में झूठे पाये गये है। उदाहरण के तौर पर पुलिस थाना महिला धौलपुर में दर्ज प्रकरण संख्या 03/2025 में परिवादिया द्वारा लगाए गए आरोपों की पुलिस द्वारा गंभीरता से जांच की गई। अनुसंधान के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपित पक्ष के व्यक्तियों द्वारा मारपीट, गाली-गलौज अथवा दुष्कर्म जैसी कोई घटना कारित किया जाना प्रमाणित नहीं हुआ। जांच में परिवादिया द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाने तथा मामला असत्य एवं झूठा पाया गया। प्रकरण में पुलिस द्वारा एफआर न्यायालय में पेश की गई, जिसे न्यायालय द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया। साथ ही झूठा मामला दर्ज करवाकर पुलिस एवं न्यायालय का समय बर्बाद करने पर संबंधित फरियादी के खिलाफ भी विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई हेतु इस्तगासा न्यायालय में पेश किया गया है। धौलपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की झूठी, भ्रामक अथवा द्वेषपूर्ण शिकायत दर्ज न करवाएं। पुलिस हर पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन झूठे मुकदमे दर्ज कर निर्दोष लोगों को परेशान करने वालों के खिलाफ भी अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक ने बताया है कि इसका मुख्य उदूपुलिस संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। झूठी शिकायतों की जांच में पुलिस का कीमती समय और ऊर्जा बर्बाद होती है, जिससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। अब सख्ती होने से न केवल निर्दोष लोग प्रताड़ना से बचेंगे, बल्कि पुलिस का ध्यान गंभीर अपराधों के नियंत्रण पर केंद्रित हो सकेगा।

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