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जब दीदियों ने थामी कमान, बूँद-बूँद बचाने का बन गया जज्बा

(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर।  सूरज अभी पूरी तरह उगा भी नहीं था कि ग्वालियर जिले के सैकड़ों गाँवों में एक अलग ही हलचल शुरू हो गई। हाथों में झाड़ू, मन में संकल्प और होठों पर जल बचाने की शपथ लिए हजारों दीदियाँ अपने-अपने गाँव की गलियों में उतर आईं। यह किसी आदेश का पालन नहीं था अपितु रचनात्मक प्रेरणा से उपजा महिलाओं का स्वयंस्फूर्त जज्बा था कि हमें पानी बचाकर अपना भविष्य बचाना है।
प्रदेश सरकार के “जल गंगा संवर्धन अभियान” को धरातल पर लाने के लिये राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं ग्वालियर जिले की ग्रामीण दीदियों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। घर की दहलीज से बाहर निकलकर “आजीविका मिशन” की दीदियों ने जल स्त्रोतों के पुनरूद्धार को अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया है। दीदियों को इसके लिये प्रेरित करने का काम जिला प्रशासन व जिला पंचायत ने किया है। गत 03 मई को सुबह ठीक आठ बजे एक साथ और एक सुर में जिले के समस्त 18 संकुल स्तरीय संगठनों और 405 ग्राम संगठनों में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की 5,230 स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं लगभग 55,000 दीदियाँ सक्रिय हो उठीं। किसी ने जंग खाए हैंडपंप को चमकाया, किसी ने स्कूल के आँगन को साफ किया, किसी ने मंदिर परिसर की नालियाँ खोलीं तो किसी ने आँगनबाड़ी केंद्र को नया रूप दिया। भितरवार की दीदियों ने तो एक कदम आगे बढ़कर सोखता पिट बनाए और जल निकासी व्यवस्था भी दुरुस्त की। तीन घंटे के इस महाअभियान में जिले के चारों विकासखंडों भितरवार, डबरा, घाटीगांव व मुरार के विभिन्न ग्रामों में332 गाँवों में हैंडपंपों की मरम्मत व सफाई दीदियों द्वारा की गई। इसी तरह 37 शासकीय विद्यालय व 27 आंगनबाड़ी केन्द्रों की साफ-सफाई की गई। इसके अलावा विभिन्न ग्रामों में स्थित 33 मंदिर व अन्य पूजा घरों की साफ-सफाई का काम भी दीदियों ने किया। यह सब काम बिना किसी ढोल-नगाड़े के, सिर्फ दीदियों की इच्छाशक्ति के दम पर पूरा हुआ।

जब दीवारें बोलने लगीं : "दीदी'स वॉल" की अनूठी सोच
इस अभियान की सबसे रचनात्मक और चर्चित पहल रही "दीदी'स बॉल"। गाँव की मुख्य दीवार पर उकेरी गई यह रंग-बिरंगी गोलाकार पेंटिंग महज एक चित्र नहीं यह गाँव की दीदियों की आर्थिक गतिविधियों का आईना है। यह एक दीवार है, जो गाँव की महिलाओं की ताकत, पारदर्शिता और उद्यमिता की कहानी सुनाती है।  इस "वॉल" (दीवार) में ग्राम संगठन का पूरा लेखा-जोखा, कृषि सखी, पशु सखी, नमो ड्रोन दीदी, लखपति दीदी जैसी आजीविका योजनाओं की जानकारी और समूह द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों की सूची, उनकी कीमतें और संपर्क नंबर दर्ज होता है।
पानी बचाने की कसम, लखपति बनने का सपना  जल संरक्षण की सामूहिक शपथ लेते हुए दीदियों ने एक और संकल्प लिया कि वे अपने गाँव की हर उस बहन तक पहुँचेंगी जो अभी तक आर्थिक रूप से पीछे है, और उसे "लखपति दीदी क्लब" तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। यानी एक ही दिन में पानी बचाने का वादा भी और आर्थिक आजादी का इरादा भी दीदियों ने दिखा। 

जब गाँव की नारी शक्ति जागती है... 
भितरवार की एक दीदी के शब्द इस पूरे अभियान की आत्मा को बयान करते हैं “हमारा गाँव, हमारी जिम्मेदारी। पानी रहेगा तो खेत रहेगा, खेत रहेगा तो घर रहेगा”। ग्वालियर जिले की इन दीदियों ने साबित करके दिखाया है कि जब संगठित महिलाएँ किसी सार्थक मकसद के लिए उठ खड़ी होती हैं तो सरकारी अभियान गाँव-गाँव की गलियों में जीवंत हो उठता है। 


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