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हार से हार नहीं मानी, शांभवी सिंह की वापसी ने दिलाया खिताब

(मधु सोलापुरकर, उपसंचालक)
ग्वालियर । ग्वालियर की बेटी शांभवी सिंह ने साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो एक सेट हारने के बाद भी मुकाबला पलटाया जा सकता है। गर्ल्स अंडर-12 टैलेंट सीरीज के डबल्स फाइनल में शांभवी और उनकी जोड़ीदार दिवेना धुपर का सामना गुजरात की अर्ना खत्री और इंदौर की प्रिशा शर्मा की अनुभवी जोड़ी से हुआ। पहला सेट 3-6 से हारकर दोनों खिलाड़ी दबाव में थीं। दर्शकों को लगा कि मैच हाथ से निकल जाएगा। लेकिन यहीं से शुरू हुई शांभवी की असली कहानी।  
जीवाजी टेनिस अकेडमी की होनहार छात्रा शांभवी ने न सिर्फ अपना संयम बनाए रखा, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ कोर्ट पर वापसी की। दूसरे सेट में दोनों ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-1 से जीत हासिल की और मैच को टाई-ब्रेक तक खींच लाईं।  टाई-ब्रेक में भी शांभवी और दिवेना ने एकजुटता और टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। अंत में 10-6 से जीत दर्ज कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। अंतिम स्कोर: 3-6, 6-1, 10-6 रहा। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि मेहनत, धैर्य और न हार मानने के जज्बे की जीत है। शांभवी ने दिखाया कि ग्वालियर की मिट्टी में भी ऐसे खिलाड़ी हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम रोशन कर सकते हैं।शांभवी की यह सफलता आने वाले समय में भारतीय टेनिस के लिए एक उज्ज्वल संकेत है। जीवाजी टेनिस अकेडमी और पूरे ग्वालियर को उन पर गर्व है। 


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