कांग्रेस का चुनावी वादा, भाजपा ने हवा में उड़ाया, पानी के बिल माफ नहीं, दो दलों की लड़ाई में पिस रही जनता
भाजपा से निगम परिषद में ठगा महसूस कर रही है ग्वालियर की जनता] ना पानी का बिल कम हुआ ना विकास
ग्वालियर। जब नगर निगम के चुनाव घोषित हुए तो कांग्रेस ने शहर की जनता से एक वादा किया था। नगर निगम के ऐसे जल उपभोक्ता जिन पर हजारों रुपए का जल कर बकाया है वह माफ कर दिया जाएगा। हजारों जल उपभोक्ताओं को कांग्रेस के इस लुभावने वादे पर भरोसा था। इसलिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के पार्षद जीतकर आए किंतु संख्या बल फिर भी कम पड़ गया। इस वजह से महापौर भले ही कांग्रेस की हो मगर नगर निगम में भाजपा की सरकार है। ऐसे में राज्य सरकार ने अब तक कांग्रेस के इस वादे को पूरा नहीं होने दिया है।
ग्वालियर की जनता आज भी खुद को ठगा महसूस कर रही है। पानी के बिल माफ न होने से उन्हें निगम से नोटिस दर नोटिस मिल रहे हैं। वहीं दूसरी तरह निगम के कोष में भी जलकर के बकाएदारों की बकाया राशि नहीं पहुंच रही है। वर्ष 2027 में नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं। फिर से जल कर की बकाया राशि को लेकर मुद्दा गरमा गया है।
नगर निगम सीमा क्षेत्र में कई उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके हजारों रुपए के बिल पानी के बकाया हैं। वहीं कई ऐसे उपभोक्ता है जो निगम कर्मियों से सांठगांठ करके नगर निगम के पानी की चोरी कर रहे हैं मगर उनके खिलाफ निगम का अमला कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। आलम ये है कि निगम के कर्मी चोरी छिपे जलकर बकाएदारों के बिल कम कर निगम के राजस्व को चपत लगा रहे हैं।
महापौर ने दिया धरना
ऐसा नहीं कि महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने जलकर की बकाया राशि को लेकर धरना दिया। धरने के बाद मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपा इसके बाद भी जलकर की बकाया राशि वाले उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल सकी है।
राज्य में भाजपा सरकार की मनमानी और विकास योजना से लेकर किये गये वादों का लाभ कहीं भाजपा को नहीं मिल जाये इसलिये ग्वालियर की जनता कांग्रेस और भाजपा रूपी चक्की में पिस रही है। और तो और भाजपा नीत सरकार द्वारा कांग्रेस के वादों में से एक भी वादा इसलिये पूरा नहीं कर पा रही है कि कहीं आगामी निगम के होने वाले चुनावों में कांग्रेस फिर से निगम पर काबिज ना हो जाये। इस प्रमुख वादे को पूरा करने पर निगम को आर्थिक लाभ होगा सरकार डर के कारण वादे को पूरा नहीं कर रही है।
विगत निगम परिषद के चुनावों में जहां भाजपा ने जनता से विकास के कई वादे किये थे वहीं कांग्रेस ने भी वर्षो से चली आ रही पानी के बिल की समस्या को लेकर तीन वर्ष का बिल लेकर पूरा बिल माफ करने की योजना बनाई थी। लेकिन राज्य में कांग्रेस की जगह भाजपा की सरकार काबिज होने के बाद से कांग्रेस के वादे पर ना तो मुख्यमंत्री ने ध्यान दिया और महापौर शोभा सिकरवार के धरने पर बैठने के बाद भी वादे का एक भी बिंदू देखा तक नहीं गया। ऐसे में ग्वालियर की जनता भाजपा से अपने आपको ठगा महसूस कर रही है। क्योंकि वह तो वोट तो देती है लेकिन महापौर कांग्रेस का बन गया तो इसमें जनता की क्या गलती। राजनैतिक सूत्र बताते है कि विगत निगम परिषद के चुनावों में भाजपा के नेताओं से भाजपा की महिला प्रत्याशी को ही ठग लिया उन्हें ना तो पार्टी से आया पैसा दिया और ना ही कोई खास मदद तन मन से की। हां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने होटलों में पार्टी की वहीं जमे पडे रहे इसका खामियाजा भाजपा प्रत्याशी को भुगतना पडा।
सब कुल मिलाकर कांग्रेस द्वारा किये वादे को जनता ने सराहा और अपना पानी का बिल माफ होने की मदद को लेकर भाजपा के साथ ही कांग्रेस को भी वोट दे डाला। हालांकि परिषद में भाजपा की महापौर तो नहीं जीत सकी लेकिन कांग्रेस महापौर जीतने के बाद भी सभापति से लेकर परिषद में बहुमत नहीं ला पाई। ऐसे में भाजपा का सभापति एवं अन्य महत्वपूर्ण पद भाजपा के पक्ष में गये। अब निगम में विकास की लडाई कांग्रेस लड रही है और अधिकारी उसका साथ मजबूरी में नहीं दे पा रहे है। वहीं कांग्रेस के वादे शून्य हो गये है और भाजपा कहीं कांग्रेस को इन वादो से फिर सत्ता पर काबिज हो जाये ऐसा सोच कर डर रही है। और सभी वादे जो जनता के हक में थे उन्हें ठंडे बस्ते में डालकर कान में रूई ठूंस कर सो रही है।
अब 2027 में फिर निगम के चुनाव है क्या भाजपा फिर कांग्रेस के उन मुददों को भी जोडेगी जिन से जनता को फायदा हो और निगम को भी आमदनी बढे। क्योंकि आज की स्थिति में निगम अपनी लेन दारी अरबों रूपये निकाले बैठा है ,और जनता पानी का वह बिल जिसका उसने कभी उपयोग ही नहीं किया उसे अपना लिखे बैठी है।