सिरपुर की प्राचीन धरोहर के संरक्षण की मांग, शिलालेख पर पुताई की शिकायत की निष्पक्ष जाँच हो
UNESCO, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और छत्तीसगढ़ शासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
ग्वालियर, । छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले स्थित ऐतिहासिक सिरपुर में गंधेश्वर महादेव मंदिर परिसर की दीवार में जड़े एक प्राचीन शिलालेख पर सफेद पेंट, चूना अथवा सीमेंट लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिलालेख की स्थिति की तत्काल जाँच और वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS), ग्वालियर के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने UNESCO World Heritage Centre, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग तथा महासमुंद जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यदि प्राचीन शिलालेख पर बाहरी सामग्री लगाए जाने से उसके अक्षर ढक रहे हैं या अभिलेख को नुकसान पहुँच रहा है, तो यह ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय है। संबंधित अधिकारियों को स्थल का निरीक्षण कराना चाहिए, शिलालेख की वर्तमान स्थिति का दस्तावेजीकरण करना चाहिए और आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों की सहायता से वैज्ञानिक संरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए।
निमराजे ने कहा कि सिरपुर भारत की बहुआयामी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ बौद्ध विहारों, बुद्ध प्रतिमाओं तथा हिंदू और जैन परंपराओं से संबंधित अनेक पुरातात्त्विक अवशेष मिले हैं। इसलिए सिरपुर के इतिहास को किसी एक धार्मिक पहचान तक सीमित करने के बजाय सभी उपलब्ध पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। विशेष रूप से इसकी बौद्ध विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक योगदान के समुचित दस्तावेजीकरण पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित संस्थाओं से माँग की कि शिलालेख की लिपि, भाषा, काल-निर्धारण और पाठ का अध्ययन योग्य अभिलेख विशेषज्ञों से कराया जाए। बिना प्रमाणित अध्ययन के उसके पाठ अथवा अनुवाद के संबंध में निश्चित दावे नहीं किए जाने चाहिए। यदि शिलालेख पर पेंट, चूना या सीमेंट लगाए जाने की पुष्टि होती है, तो उसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जाँच कर उचित कार्रवाई की जाए।
श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने देशभर के बौद्ध संगठनों, इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, सामाजिक संस्थाओं और मीडिया से भी अपील की कि वे इस विषय को प्रमाणों के आधार पर उठाएँ। आवश्यकता पड़ने पर छत्तीसगढ़ में शांतिपूर्ण ज्ञापन, जन-जागरूकता कार्यक्रम और लोकतांत्रिक अभियान आयोजित किए जाएँ, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा, “प्राचीन शिलालेख केवल पत्थर पर लिखे अक्षर नहीं, बल्कि हमारे इतिहास के मूल साक्ष्य हैं। उनकी उपेक्षा या क्षति से अतीत को समझने के महत्त्वपूर्ण स्रोत प्रभावित हो सकते हैं। सिरपुर की बौद्ध विरासत सहित सभी ऐतिहासिक अवशेषों का संरक्षण वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पारदर्शिता और समान सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।”
प्रमुख माँगें:
1. संबंधित शिलालेख का तत्काल विशेषज्ञ निरीक्षण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण।
2. पुताई संबंधी शिकायत की निष्पक्ष जाँच।
3. आवश्यकता पड़ने पर संरक्षण विशेषज्ञों द्वारा सुरक्षित उपचार।
4. सिरपुर के बौद्ध, हिंदू और जैन पुरातात्त्विक अवशेषों का प्रमाण-आधारित संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण।
5. जाँच और संरक्षण संबंधी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना।
जारीकर्ता:
श्रीप्रकाश सिंह निमराजे
अध्यक्ष, गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS)
ग्वालियर, मध्य प्रदेश