वाह सरकारः रिश्वत लेते पकड़े गये संतोषीलाल को पीएचई की कमान

(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर। मप्र में अब अजीबोगरीब फैसले किये जा रहे हैं, अब देखिये लोकायुक्त द्वारा गत दिनों सागर में डेढ़ लाख रूपये की रिश्वत लेते पकड़े गये प्रभारी कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग संतोषीलाल बाथम को ग्वालियर में पीएचई का कार्यपालन यंत्री बना दिया गया है। संतोषी लाल बाथम को अभी कुछ ही समय पहले उनके ड्रायवर सहित सागर लोकायुक्त टीम ने पकड़ा था। बाथम ने एक ठेकेदार शैलेष कुमार से भुगतान के एवज में 6 लाख रूपये मांगे थे, जिसमे उसे पहली किश्त के रूप में उनके वाहन चालक फूल सिंह यादव के माध्यम से डेढ़ लाख रूपये मिले थे, तभी लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें दबोच लिया था। सागर के लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा ने यह पूरा मामला अपने अधीनस्थों द्वारा ट्रेस करवाया था। 
यहां यह ज्ञांतव्य है कि संतोषीलाल बाथम इससे पहले भी विभिन्न मामलों में निविदा दरों में हेराफेरी कर शासन को हानि पहुंचाने के संबंध में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने पर 4 जुलाई 2025 को राज्य शासन द्वारा निलंबित भी किये जा चुके है। बाथम के पदस्थ होने से नगर निगम के पीएचई विभाग में हड़कंप मचा हुआ है कि शासन को कहीं और कोई स्वच्छ छवि का ईमानदार कार्यपालन यंत्री नहीं मिला। 

बिना वजह निलंबित गुप्ता 
वहीं पीएचई के कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता को बेवजह बिना आरोप के निलंबित किये जाने की भी चर्चा जोरों पर है। उनको उन काम के आरोपों में निलंबित किया गया हैं, जो काम उन्होंने नहीं पीडब्ल्यूडी के सेतु संभाग ने किया हैं। सेतु संभाग ने स्वर्ण रेखा नाले की अंडरग्राउंड अंडरग्राउण्ड सीवर की मैन ट्रंक लाइन एलिवेटेड रोड के पिलरों ने पूरी ध्वस्त कर दी है और ठीक भी नहीं कराई है। इसकी शिकायत पीएचई कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता ने शासन को की थी। डीपीआर भी काम के लिये भेजी थी। लेकिन बजट सेंशन नहीं हुआ और न उच्चाधिकारियों ने काम के निर्देश दिये। गत दिवस जब एसीएस नगरीय प्रशासन यहां आये तो और स्वर्ण रेखा की स्थिति जानी तो पीएचई के कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता पर ही बेवजह गाज गिरा दी। जबकि चेतकपुरी जमीन मामले में दोषी लोगों पर वह कार्रवाई भारी दबाब के चलते कर नहीं पाये थे। 

पीडब्ल्यूडी सेतु संभाग पर होनी थी कार्रवाई
स्वर्ण रेखा नाले की अंडरग्राउण्ड सीवर की मैन ट्रंक लाइन  डेमेज होने पर सेतु संभाग के इंजीनियरों व ठेकेदार पर कार्रवाई होनी थी। यह सीवेज लाइन डेमेज होने से बरसात में भारी बाढ़ व जलभराव की आशंका पैदा हो गई हैं। 

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