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वर्षा जल सहेजने के लिए विकासखण्ड स्तर तक मास्टर प्लान बनाएँ: गोयल

03-Aug-22 32
Sandhyadesh

ग्वालियर । वर्षा जल सजेहने एवं पानी के रीचार्ज के लिए विकासखण्ड स्तर तक मास्टर प्लान बनाएँ। मास्टर प्लान के अनुसार पुरानी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के साथ-साथ नई संरचनाओं का निर्माण कर और बेहतर प्रबंधन कर हम जल संकट से बच सकते हैं। यह बात भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल शक्ति अभियान के निदेशक गिरिराज गोयल ने ग्वालियर जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल शक्ति अभियान के तहत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा के दौरान कही। बुधवार को यहाँ जिला पंचायत के सभागार में आयोजित हुई बैठक में कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष तिवारी, दिल्ली से आए जल शक्ति अभियान के वरिष्ठ अधिकारी संतोष कुमार, अधीक्षण यंत्री पीएचई नगर निगम आर एल एस मौर्य तथा कार्यपालन यंत्री पीएचई ग्रामीण क्षेत्र सहित कृषि, मत्स्य, वन एवं जिला पंचायत सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। 
निदेशक जल शक्ति अभियान गोयल ने कहा कि अध्ययन बताते हैं कि हम मात्र 8 प्रतिशत वर्षा जल का ही उपयोग कर पाते हैं। वर्षा का शेष पानी बहकर चला जाता है। इस पानी को रोककर हम सिंचाई व निस्तार संबंधी सभी जरूरतें पूरी कर सकते हैं। वर्षा जल रोकने के साथ-साथ जल प्रबंधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। वर्षा जल रोकने के लिये तालाबों का निर्माण, वनीकरण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग व जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन की छोटी-छोटी संरचनायें अत्यंत कारगर भूमिका निभाती हैं। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने नगर निगम एवं ग्रामीण अंचल में जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल शक्ति अभियान की गाइडलाइन के तहत जिले में जल संरक्षण व संवर्धन कार्यों को अंजाम दिया जाए। साथ ही मुरार व बेसली नदी सहित जिले की अन्य नदियों को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना तैयार करें। 
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष तिवारी ने ग्वालियर शहर एवं ग्रामीण अंचल में जल शक्ति अभियान के तहत चलाई जा रहीं गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिले के ग्रामीण अंचल में अभियान के तहत 3 हजार 623 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 3 हजार 190 जल संरक्षण कार्य प्रगति पर हैं। इन कार्यों में जल संवर्धन व रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पुरानी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार व नई संरचनाओं का निर्माण एवं जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के तहत जल संरचनाओं का निर्माण शामिल है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में भी पुराने जल स्त्रोतों के संरक्षण का काम कराया जा रहा है। शहर में लगभग 3 हजार जल संरचनाओं की जिओ टैगिंग कराई गई है। साथ ही नमामि गंगे अभियान के तहत मुरार नदी के जीर्णोद्धार का काम हाथ में लिया गया है। 
अधीक्षण यंत्री ग्वालियर नगर निगम आर एल एस मौर्य ने जानकारी दी कि नगर निगम के एसटीपी से नहरों के जरिए मत्स्य जलाशयों को भरने के लिये पानी लिया जा सकता है। बैठक में वन, जल संसाधन, कृषि एवं मत्स्य विभाग द्वारा बनाई जा रही जल संरचनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। 

ग्वालियर शहर के आस-पास की पहाड़ियों पर वृहद वृक्षारोपण कराने पर जोर 
जल शक्ति अभियान के निदेशक गिरिराज गोयल ने बैठक में कहा कि ग्वालियर शहर के आस-पास स्थित पहाड़ियों पर वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाए। इन पहाड़ियों को शिक्षण संस्थानों एवं स्वयंसेवी व सामाजिक संस्थाओं को वृक्षारोपण के लिए गोद लिया जा सकता है। 

खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़ हों 
जल शक्ति अभियान के निदेशक गिरिराज गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हर खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़ लगाने का आह्वान किया है। यह जल संरक्षण और मिट्टी के कटाव को रोकने में अत्यंत कारगर विधि है। इसलिए ग्वालियर जिले में भी प्रमुखता के साथ इस काम को अंजाम दिया जाए। 

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