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बागियों के भंवर में भाजपा-कांग्रेस, खिसकती जमीन

28-Jun-22 109
Sandhyadesh


ग्वालियर। ग्वालियर समेत पूरे सूबे में बागियों के भंवर में भाजपा और कांग्रेस फंस गई है। नगर की सरकारों को चुनने के लिए जनता के बीच अब भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ उनके बागी भी मैदान में है। जिससे अधिकृत प्रत्याशियों की जमीन खिसकती दिख रही है। सूबे में 7 महापौर के बागी उम्मीदवारों ने भी ताल ठोंक रखी है। जिसमें 4 कांग्रेस तो 3 भाजपा के हैं। वहीं 2 हजार से ज्यादा पार्षद पद के लिए बागी चुनावी समर में ताल ठोंककर अपनी दमखम दिखा रहे है।
मध्यप्रदेश नगरीय निकाय चुनाव में डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा और कांग्रेस को बड़ा झटका उस समय लगा है जब दोनों दलों की बागियों को मनाने की कवायद फेल हो गई। 16 में से 6 नगर निगमों में 7 ऐसे मेयर उम्मीदवार चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं, जिन्होंने महापौर की कुर्सी के लिए पार्टी से बगावत की है। इनमें कांग्रेस के 4 और भाजपा के 3 नेता शामिल हैं। कांग्रेस महिला मोर्चा ग्वालियर की पूर्व जिला अध्यक्ष रुचि गुप्ता और सतना में कांग्रेस के सईद अहमद ने तो चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ही बदल ली। अहमद बीएसपी के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। रुचि आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि, छिंदवाड़ा में बीजेपी से बागी हुए जितेंद्र शाह को मना लिया है, लेकिन वे चुनाव मैदान में बने रहेंगे। इस बार नगर निगम ग्वालियर का महापौर पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। बीजेपी से सुमन शर्मा और कांग्रेस से डॉ. शोभा सतीश सिकरवार में आमने-सामने का मुकाबला है। टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष व प्रदेश महिला मोर्चा की सदस्य रहीं रुचि गुप्ता ने पार्टी से बगावत कर ली। वह आम आदमी पार्टी की सदस्यता लेकर चुनाव मैदान में उतर गई हैं।
तीसरे दल और निर्दलीय के तौर पर बड़ी संख्या में बागी अब भी पूरे सूबे मैदान में हैं। नामांकन वापसी के आखिरी दिन बागियों को मनाने की तमाम कोशिशों के बावजूद भी सिर्फ 32 महापौर उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए, जबकि 4 उम्मीदवारों के नामांकन त्रुटि के कारण निरस्त कर दिए गए। अब प्रदेश की 16 नगर निगम में महापौर पद के लिए कुल 145 उम्मीदवार चुनाव मैदान में ताल ठोंकते नजर आ रहे हैं। वहीं ग्वालियर में महापौर पद के लिए 7 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं। आमने सामने का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है। जबकि आप की रूचि गुप्ता दोनों दलों के वोटों में काफी हद तक सेंध लगा सकती है। आप ने भी काफी लोक लुभावन वायदे किये हैं।

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