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उदभव साहित्यिक मंच ने किया वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री कुंदा जोगलेकर का सम्मान

18-May-22 65
Sandhyadesh


चतुर्थ साहित्य गोष्ठी सम्पन्न हुई     
                                                                                                                                                            ग्वालियर । दिनाँक 17.05.2022 । उदभव साहित्यिक  मंच ने अपनी नियमित मासिक गोष्ठी का  आयोजन आज किया गया  ।  गोष्ठी के  अंतर्गत नगर की वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री कुंदा जोगलेकर को सम्मानित किया ।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष डॉ  केशव  पांडेय ने की।डॉक्टर पांडेय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्था वरिष्ठ साहित्यकारों का मार्गदर्शन प्राप्त कर साहित्य के क्षेत्र में कुछ बेहतर कार्य करने की मंशा के साथ स्थपित की गई है। इसी कड़ी में आज ग्वालियर की वरिष्ठतम साहित्यकार सुश्री कुंदा जोगलेकर जी का आशीर्वाद संस्था को  प्राप्त हुआ ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अथितियों द्वारा माँ सरस्वती का माल्यार्पण कर किया  
तत्पश्चात संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर केशव पांडे एवं सचिव दीपक तोमर ने  सुश्री कुंदा जोगलेकर  का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। अपने उद्बोधन में डॉक्टर केशव पांडे ने साहित्यिक मंच के आगामी कार्यक्रमों के बारे में  भी प्रकाश डाला।
गोष्ठी का प्रारम्भ करते हुए अरविन्द जादोन ने पढ़ा
‘‘ कैसे अब हो गुजारा, मंहगाई ने मारा सस्ती हुई है बस जान बिकती है अब तो इंसान‘‘
श्रीमती लाजवंती कुशवाह की रचना इस प्रकार थी 
वंदना - मॉ शारदे स्वीकार कर
चरणों में अपनी वन्दना
कविता (जीवन जीते रहते है-)
जीवन का कुछ अर्थ न जाना
जीवन जीते रहते हैं।
आलोक शर्मा ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा
‘‘गुनगुनाने के लिए में कुछ तराने खोजता हूँ।
कुछ कदम संग चलने में बहाने खोजता हूँ।
वैसे भी इस दुनिया में है दुनिया भर में गम।
मैं तो हँसने और मुस्कराने के बहाने खोजता हूँ।‘‘
जगदीश गुप्त ने प्रकृति संरक्षण में हिन्दू संस्कृति की अनिवार्यता पर आलेख प्रस्तुत किया
चर्चित गजलकार सुधीर कुशवाह ने गजल प्रस्तुत करते हुए कहा
‘‘नए कपड़े भी रोयें छोड़ देते है
सगे रिश्‍ते भी दिल को तोड़ देते है।
मैं सच में जब बहुत मुश्किल में होता,
तो बच्चे अपनी गुल्लक तोड़ देते है।‘‘
वरिष्ठ गीतकार किंकर पाल सिंह जादौन ने गीत कुछ इस तरह पढ़ा ‘‘जीने की तैयारी करते जीवन बीत गया।‘‘
अनंगपाल सिंह भदौरिया ने पढ़ा ‘‘आओ चलो आदमी ढूंढे, इस सुंदर संसार में।
वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री कुंदा जोगलेकर ने गोष्ठी का समापन ‘‘वो एक दिन‘‘ (पक्षी प्रेम) कहानी प्रस्तुत कर किया।
गोष्ठी का संचालन सुरेन्द्रपाल सिंह कुशवाह एवं आभार संस्था के सचिव श्री दीपक तोमर ने किया। श्रीमती लाजवंती कुशवाह द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।उक्त अवसर पर श्रीमती रजनी तोमर, मिताली तोमर आदित्य सविता,  अरविन्द जैमिनी ,वरुण सक्सेना ,अंश प्रताप सिंह जादौन विशेष रूप से उपस्थित थे।

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